: योगी बोले- यूपी ने अराजकता का तांडव देखा और झेलाः
Mon, Mar 24, 2025
उसी
तंत्र
से
हमने
बदलाव
किया
, _
अखिलेश का पलटवार- 8 साल, प्रदेश बर्बाद….
योगी बोले- यूपी ने अराजकता का तांडव देखा और झेलाः
उसी तंत्र से हमने बदलाव किया, _
अखिलेश
का
पलटवार
- 8
साल
,
प्रदेश
बर्बाद
….
लखनऊ
:
योगी सरकार के आज 8 साल पूरे हो गए।
इस मौके पर सीएम योगी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
कहा- यूपी ने अराजकता का तांडव देखा और झेला है।
दंगों के माध्यम से अपनी बिगड़ती हुई अर्थव्यवस्था को भी देखा था।
प्रदेश वही है, तंत्र भी वही है।
सिर्फ सरकार बदलने से व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है?
यह 8 सालों में यूपी की जनता ने महसूस किया।
योगी
ने
कहा
- 2017
से
पहले
की
कानून
व्यवस्था
सभी
जानते
हैं
,
बेटियां सुरक्षित नहीं थीं।
45 दिन के कुंभ में कोई छेड़छाड़,
अपहरण और लूट की घटना नहीं हुई।
आठ साल में सरकार ने पुलिस बल को व्यवस्थित किया है।
सीएम योगी के बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार किया।
X
पर
लिखा
-
आठ
साल
,
यूपी
बर्बाद
और
सवाल
ही
सवाल।👈🏻
: परिसीमन पर ममता मौन तो अखिलेश साइलेंट, मोदी को घेरने से पहले ही बिखर गया विपक्ष, जानिए ये कारण…
Sun, Mar 23, 2025
नई दिल्ली:–
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन परिसीमन के मुद्दे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं और वह भाजपा सरकार को दक्षिण विरोधी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो दक्षिण को लोकसभा और विधानसभा दोनों के लिए भारी नुकसान होने वाला है।
इस मुद्दे पर उन्होंने शिवहर पर चेन्नई में विपक्षी दलों की बड़ी बैठक बुलाई थी। इस बैठक में ओडिशा और पंजाब के अलावा दक्षिणी राज्यों के कांग्रेस नेताओं ने भी हिस्सा लिया। हालांकि पहली ही बैठक में हिंदी पट्टी और महाराष्ट्र की पार्टियों ने खुद को अलग कर लिया। वहीं टीएमसी भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई। ऐसे में इस बैठक से यह बात भी सामने आई है कि परिसीमन के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट नहीं है।
बैठक में क्यों नहीं पहुंची सपा?
दक्षिण के राज्यों का कहना है कि अगर जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो उनकी सीटें कम हो जाएंगी। लोकसभा सीटों का परिसीमन 2026 की जनगणना के बाद होना है। डीएमके ने इस बैठक में उत्तर के विपक्षी दलों को नहीं बुलाया। इसमें सपा और आरजेडी के अलावा कई पार्टियां भी शामिल थीं। इसके अलावा महाराष्ट्र से शिवसेना और एनसीपी भी शामिल नहीं थी। बैठक में टीएमसी को बुलाया गया था लेकिन टीएमसी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
पश्चिम बंगाल में बढ़ेंगी सीटें
अगर 1977 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो औसतन 10.11 लाख लोगों पर एक सांसद होता था। अब अगर परिसीमन होता है तो उत्तरी राज्यों और पश्चिम बंगाल में सीटें बढ़ेंगी। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की सीटें 42 से बढ़कर 66 हो सकती हैं। ऐसा तब होगा जब 15 लाख की आबादी को आधार माना जाएगा। वहीं अगर 20 लाख की आबादी के आधार पर परिसीमन होता है तो भी पश्चिम बंगाल में 50 सीटें होंगी।
ममता-अखिलेश की मौन क्यों?
शायद यही वजह है कि टीएमसी ने अभी तक इस मामले पर अपना रुख साफ नहीं किया है। क्योंकि बंगाल में ममता मजबूत हैं। वहीं खबरों की मानें तो समाजवादी पार्टी भी अभी इस मामले पर चर्चा नहीं करना चाहती है। समाजवादी पार्टी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की पार्टी है और आबादी के आधार पर उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सीटें जरूर बढ़ेंगी।
क्या हैं साउथ के समीकरण
परिसीमन के बाद तमिलनाडु में भी सीटें बढ़ेंगी, हालांकि इनकी संख्या दोगुनी नहीं होगी। केरल में 20 से 36 सीटें बढ़ सकती हैं। अगर 20 लाख की आबादी के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 707 हो जाएगी। ऐसे में दक्षिणी राज्यों को सीटों का नुकसान होना तय है।
इस फॉर्मूले से तमिलनाडु के पास सिर्फ 39 सीटें रह जाएंगी। केरल को दो सीटों का नुकसान होगा। इसका फायदा यूपी, बिहार और झारखंड को होगा। अगर 15 लाख की आबादी के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो कुल सीटों की संख्या बढ़कर 942 हो जाएगी। दक्षिणी राज्यों को उत्तरी राज्यों के मुकाबले कम सीटें मिलेंगी।
: जल जीवन का आधार और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन : पीएम मोदी
Sat, Mar 22, 2025
हर साल 22 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व जल दिवस वर्ष 1993 से शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य ताजे पानी के महत्व को उजागर करना…
नईदिल्ली (ए)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व जल दिवस के अवसर पर जल संरक्षण और सतत विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की जरूरत पर जोर दिया और भारत में जल सुरक्षा के लिए चल रहे प्रयासों को उजागर किया। हर साल 22 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व जल दिवस वर्ष 1993 से शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य ताजे पानी के महत्व को उजागर करना और सतत विकास लक्ष्य 6 को पूरा करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सभी को पानी और स्वच्छता तक पहुंच दिलाना है। इस साल की- ‘ग्लेशियर संरक्षण’ है।
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “विश्व जल दिवस पर हम जल संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को दोहराते हैं। जल ही जीवन का आधार है, इसलिए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाना जरूरी है।”
एक वीडियो संदेश में पीएम ने भारत में जल संरक्षण की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जल जीवन का आधार और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। हमारे पूर्वजों ने जल संरक्षण को हमेशा प्राथमिकता दी है। वेदों और पुराणों में भी जलाशय, बांध और तालाब बनाने को मानव का परम कर्तव्य बताया गया है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने जल संकट को देश के विकास के लिए भी खतरा बताया। उन्होंने जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता, प्रबंधन और रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “गांवों में जल स्रोतों के संरक्षण के लिए भी प्रयास हो रहे हैं। हो सकता है कि जहां आप रहते हैं, वहां पानी की कोई कमी न हो, लेकिन हमें उन लाखों लोगों को याद रखना चाहिए, जो पानी की कमी का सामना कर रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने नदियों के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदियों की रक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए महाकुंभ जैसे आयोजनों से प्रेरणा लेकर नदी उत्सवों को नया अर्थ देना चाहिए। इससे नई पीढ़ी को जल की महत्ता का एहसास होगा और वे स्वच्छता और संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे।