: Amit Jogi On Result: प्रदेश की सियासत से ‘जोगी परिवार’ का सफाया.. पर क्या पूरा हुआ JCC का मकसद? देखें क्या रहा अमित, रेणू और ऋचा का हाल..
सबसे पहला, अगर प्रदेश में किसी क्षेत्रीय विकल्प की कोई उम्मीद है, तो सभी हितधारकों के बीच जमीनी स्तर पर विचारधारा, मुद्दों और संगठन का समन्वय होना चाहिए। (मैं शुरू से ही यह कह रहा हूं।)
रायपुर: चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में तीन राज्यों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। एमपी में जहाँ शिवराज सिंह को हटाकर उनके सत्ता में आने का सपना चकनाचूर हो गया तो वही छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। सबसे करारी हार का सामना कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में ही करना पड़ा। पिछली बार प्रचंड सीटों के साथ सरकार में आई कांग्रेस की सीट इस बार आधी रह गई।
TS Singhdeo On Result: ‘मुझे CM बनाते तो मुमकिन नतीजे कुछ और होते’.. रिजल्ट के बाद टीएस सिंहदेव

इसी तरह छत्तीसगढ़ में तीसरी ताकत के तौर पर चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस की खिलाफत करने वाली जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ को भी बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस तरह 23 साल बाद छत्तसीगढ़ की राजनीति से जोगी परिवार की सियासत लगभग ख़त्म हो गई। जकाँछ की एक सीट कोटा से भी रेणू जोगी हार गई जबकि पाटन से खुद अमित जोगी भी हार गए। इसी तरह अकलतरा से उनकी पत्नी ऋचा जोगी भी मैदान में थी। यहाँ से कांग्रेस के राघवेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की।
वही इस पूरे नतीजे के बाद जेसीसी (जे) चीफ अमित जोगी ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से द्विध्रुवीय चुनाव हुआ है जिसमें सभी क्षेत्रीय खिलाड़ियों का बड़े पैमाने पर सफाया हो गया हालाँकि इसका सबसे बड़ा नुक़सान सत्ताधारी पार्टी को ही हुआ है। इस परिणाम के मेरे लिये विशेषकर दो निष्कर्ष हैं।

सबसे पहला, अगर प्रदेश में किसी क्षेत्रीय विकल्प की कोई उम्मीद है, तो सभी हितधारकों के बीच जमीनी स्तर पर विचारधारा, मुद्दों और संगठन का समन्वय होना चाहिए। (मैं शुरू से ही यह कह रहा हूं।) दूसरा, हमें केवल राष्ट्रीय पार्टियों की लाइन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, अपनी विशिष्ट राजनीतिक शब्दावली का उपयोग करते हुए, अपनी शर्तों पर लोगों के लिए लड़ना होगा, उनके मुद्दे उठाने होंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में क्षेत्रिवाद को सैद्धांतिक रूप से एक समकालीन परिभाषा दी जा सके। केवल और केवल तभी लोगों में हम में इतनी गंभीरता दिखेगी कि वे हमें अपना बहुमूल्य वोट और समर्थन देने के लिए सोचें। मुझे उम्मीद है कि यह परिणाम हम सभी के लिए सीखने का अवसर होगा।

छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से द्विध्रुवीय चुनाव हुआ है जिसमें सभी क्षेत्रीय खिलाड़ियों का बड़े पैमाने पर सफाया हो गया हालाँकि इसका सबसे बड़ा नुक़सान सत्ताधारी पार्टी को ही हुआ है। इस परिणाम के मेरे लिये विशेषकर दो निष्कर्ष हैं।
सबसे पहला, अगर प्रदेश में किसी क्षेत्रीय विकल्प की…
जोगी परिवार की सियासत का सफाया
छत्तीसगढ़ में 23 साल की राजनीति में यह पहल मौका होगा जब सदन में जोगी परिवार का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं रहेगा। बात करे मौजूदा चुनाव की तो अमित जोगी पाटन से बुरी तरह हारे है। उन्हें भूपेश बघेल के हाथों 90 हजार से ज्यादा वोटों से सामना करना पड़ा। यहाँ भूपेश बघेल को 95 हजार 438, दूसरे पायदान पर रहे भाजपा के विजय बघेल को 75 हजार 715 जबकि अमित जोगी को महज 4 हजार 822 वोट ही मिले। वह तीसरे नंबर पर रहे है।
बात कोटा की करें तो यहाँ कांग्रेस ने वापसी की है। विजयी उम्मीदवार अटल श्रीवास्तव 73 हजार 479 तो दूसरे नंबर पर रहे 65 हजार 522 जबकि तीसरे नंबर पर ही रेणू जोगी को महज 8 हजार 884 वोटों से संतोष करना पड़ा।
जोगी परिवार तीसरे सदस्य जो मैदान में थी वह थी अकलतरा से ऋचा जोगी। ऋचा को भी करारी मात मिली है। यहाँ से वह भी तीरसे नंबर पर रही। कांग्रेस के राघवेंद्र सिंह को 80 हजार 43, भाजपा के 57 हजार 285 तो वही ऋचा जोगी को 16 हजार 464 वोट ही मिलें।

Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन