: महादेव सट्टा एप का मालिक सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार
Fri, Oct 11, 2024
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक साधारण जूस विक्रेता से महादेव ऐप के सट्टेबाजी सरगना बनने तक, सौरभ चंद्राकर का सफर अब समाप्ति पर पहुंच चुका है। खबरों के अनुसार सौरभ चंद्राकर को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। दुबई में उसकी गिरफ्तारी इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर की गई, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर जारी किया गया था। यह गिरफ्तारी भारतीय एजेंसियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है, जिसमें विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने प्रमुख भूमिका निभाई।
महादेव ऐप सट्टेबाजी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
लगभग डेढ़ महीने पहले, छत्तीसगढ़ सरकार ने महादेव ऐप सट्टेबाजी घोटाले की जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्णय लिया। यह निर्णय 22 अगस्त को लिया गया था, जिसके बाद चंद्राकर की गिरफ्तारी हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया था कि घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए सीबीआई को जांच सौंपी गई।
CBI और ED की भूमिका
CBI और ED ने इस घोटाले की गहराई में जाकर जांच की, जिससे चंद्राकर की गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ। अब तक 572.41 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है, जिसमें 100 करोड़ रुपये की संपत्ति दुबई में है। यह गिरफ्तारी अत्यंत गोपनीय तरीके से की गई थी, जिसमें केवल कुछ शीर्ष अधिकारियों को इसकी जानकारी थी। उच्च-स्तरीय सूत्रों ने बताया कि चंद्राकर को आसानी से गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई को पूरी तरह गुप्त रखा गया। दुबे में गिरफ्तारी के बाद, भारत सरकार और CBI को जानकारी मिलने पर प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज हो गई। MEA (विदेश मंत्रालय), MHA (गृह मंत्रालय), ED, और CBI ने संयुक्त रूप से काम किया, सभी औपचारिकताओं को बिना देरी के पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग का योगदान
इस ऑपरेशन की सफलता में दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) राम गोपाल गर्ग का योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने CBI में अपने अनुभव का उपयोग करते हुए चंद्राकर की हर गतिविधि पर नज़र रखी और CID के माध्यम से एक अनूठी अनुरोध प्रक्रिया चलाई। उन्होंने जुलाई 2024 में गृह मंत्रालय को तत्काल अनुरोध भेजा, जिससे प्रोविजनल अरेस्ट और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।
: दुर्ग सेंट्रल जेल में वसूली की शिकायत, आईजी से गुहार, जेल अधीक्षक ने क्या कहा, जानिए
Thu, Oct 10, 2024
दुर्ग : छत्तीसगढ़ की दुर्ग सेंट्रल जेल से छूटने के बाद भिलाई के जामुल निवासी एन सुनील नाम के युवक ने आईजी रामगोपाल गर्ग से लिखित शिकायत की है. उसने आरोप लगाया है कि जेल में सुविधाओं के लिए मुख्य प्रहरी रमेश बारसे और कैदी दीपक नेपाली उसके साथ मारपीट करते थे, साथ ही दबाव बनाकर चक्कर अधिकारी के लिए स्कूटी भी खरीदवाया. शिकायत मिलते ही तत्काल आईजी रामगोपाल गर्ग ने इस पर संज्ञान लिया है.
दोषी होने पर कार्रवाई का दिया भरोसा : दुर्ग सेंट्रल जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने बताया, ”शिकायत की कॉपी हमें भी आईजी ऑफिस से मिली है. संबंधित सेक्टर प्रभारी का चार्ज मुख्य प्रहरी रमेश बारसे के पास था, उनको हटाया गया है, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है. जांच में यह पाया जाता है कि वह दोषी हैं तो उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी.”
दुर्ग सेंट्रल जेल अधीक्षक मनीष संभाकर के मुताबिक, दीपक नेपाली पर पहले भी प्रकरण दर्ज थे, पहले भी जेल स्थानांतरण के लिए प्रयास किया गया था. हमने फिर आवेदन लगाया है. हमें उम्मीद है कि जल्द ही जेल ट्रांसफर के लिए अभिमत आ जाएगा.
जेल में किसी भी प्रकार का स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं”: मनीष संभाकर ने यह भी कहा कि जेल में किसी भी प्रकार का स्पेशल ट्रीटमेंट या विशेष सुविधाएं उपलब्ध नहीं है. सभी लोगों को समान ट्रीट किया जाता है. लगातार विधिक सेवा प्राधिकरण के सेक्रेटरी विजिट करते हैं. अभी डिस्ट्रिक्ट जज ने विजिट किया. जेल की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है.
किसी को शिकायत करना होता है तो वह बता सकता है. हर सोमवार को बंदियों के लिए साप्ताहिक परेड आयोजित होती है. इसमें बंदी को कोई समस्या है तो वह बताता है और उसका निराकरण भी किया जाता है. : मनीष संभाकर, जेल अधीक्षक, दुर्ग सेंट्रल जेल
“हम लगातार तलाशी अभियान चला रहे”: दुर्ग सेंट्रल जेल अधीक्षक मनीष संभाकर ने यह भी कहा कि जेल के ऊपर सवाल नहीं उठते, जेल में शिकायतें होती रहती हैं. बहुत सारी शिकायत आपसी दुश्मनी की भी होती है. लगातार हमें शिकायतें मिली हैं, जिसमें जांच की गई है.
हम लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं. फिलहाल जेल के अंदर मोबाइल चलाने की सीधी शिकायत हम तक नहीं पहुंची है. हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं : मनीष संभाकर, जेल अधीक्षक, दुर्ग सेंट्रल जेल
दुर्ग सेंट्रल जेल अधीक्षक के मुताबिक तीन चार प्रकरण ऐसे मिले जिसमें शिकायतकर्ता को पत्र भेजा गया, लेकिन वह नहीं आया. जब कभी शिकायतकर्ता मिला भी, वह गवाही देने पहुंचा, उसमें यह तथ्य भी सामने आया कि उसने शिकायत ही नहीं की थी. फिर भी हम लगातार प्रायमरी कार्रवाई कर रहे हैं. जो प्रकरण हमारी जेल से संबंधित होते हैं, उसमें कार्रवाई की जाती है.
: कुम्हारी टोल नाका हटाने सांसद से पहल करने की मांग
Mon, Oct 7, 2024
भिलाई। जनहित संघर्ष समिति के संयोजक शारदा गुप्ता के नेतृत्व में कुम्हारी टोल नाका हटाने सांसद से पहल करने मांग की गई। संयोजक शारदा गुप्ता ने कहा कि कुम्हारी टोल नाका के कारण लोगों को कई बार 15 से 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। देश के बहुमूल्य डीजल पेट्रोल व्यर्थ में फूंका जाता है। लोगों की बहुमूल्य समय जो परीक्षा देना जा रहे है नौकरी पेशा हॉस्पिटल जाना हो उन सब को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। शाम को अकसर बहुत जाम रहता है। टोल नाका यहां से तत्काल हटाया जाना चाहिए जिससे लोगों को सुगम यातायात व्यवस्था प्रदान हो सके।
टोल नाका से वसूली के पैसे का कहां उपयोग किया जा रहा है। भिलाई से लेकर रायपुर तक रोड की स्थिति बद से बदतर है।लोग हिचकोले खा रहे हैं। बेकसूर लोगों की इस जानलेवा सड़क से जान जा रही है।जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं। इसकी डामरीकरण नहीं हो पा रही है। जगह जगह अमानक ब्रेकर बने हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री आवास भिलाई 3 सिरसा कला गेट के सामने स्पीड ब्रेकर और सिंगनल से गुजरने में भी 15 मिनट समय लग रहा है। रायपुर आना-जाना दुभर हो चुका है। कई बार शिकायत करने के बाद भी निवारण नहीं हो रहा है। इसी सड़क से रोज मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री खुद आवागमन करते हैं मगर उनके लिए आम जनमानस को रोककर रास्ता प्रदान कर दिया जाता है। आम जनमानस को होने वाली परेशानियों की कौन सुनेगा आखिर असहाय जनता कहां किसके दरबार जाए ।
जनहित संघर्ष समिति के संयोजक शारदा गुप्ता ने सांसद से मिलकर निवेदन किया टोल नाका को शीघ्र हटाया जाए। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी ने कहा है कि 60 किलोमीटर के अंतर्गत केवल एक टोल प्लाजा होना चाहिए। यहां 60 किलोमीटर के अंतर्गत तीन टोल प्लाजा अवैध रूप से निर्मित है। टोल नाका में आवागमन में भारी तकलीफ का सामना से आमजन मानस में भारी आक्रोश व्याप्त है।
टोल नाका पर काम करने वाले कर्मचारियों की धीमी गति से काम करने से आवागमन में देरी होती है या टोल नाका पर तकनीकी समस्याएं आने से आवागमन में रुकावट आ रही है या टोल नाका पर यातायात की भीड़ होने से आवागमन में देरी हो रही है।जबकि फास्ट ट्रैक में यह सिस्टम है कि 2 मिनट से ज्यादा लाइन लगे होने पर टोल नाका नहीं लिया जाएगा यहां 2 मिनट क्या लोग 15 मिनट खड़े रहते हैं सरकार ने फास्ट ट्रैक सिस्टम इसीलिए बनाया कि लोगों को लाइन लगाने की आवश्यकता ना हो आखिर यहां पर लाइन क्यों लग रही है। कई बार लोगों से बहस की स्थिति में भी जाम की स्थिति लग रही है शारदा गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर इस समस्या का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है।
मांग करने वाले में प्रमुख रूप से मांग करने वालो मे शारदा गुप्ता मदन सेन निशु पांडे डॉ रमेश श्रीवास्तव सुभाष साव कन्हैया सोनी पारस जंघेल रवि शंकर सिंह संतोष जयसवाल गुरनाम सिंह बंटी नाहर हरिशंकर चतुर्वेदी अजय प्रसाद अखिलेश वर्मा जेपी घनघोरकर इंदरजीत सिगं सीपी सिंह विनोद उपाध्याय हंसराज पटेल श्रीनिवास मिश्रा सुभाष शर्मा प्रदीप पांडे दिनेश लोहिया रमेश देशमुख नेहरू साहू तुषार देवांगन निर्मल भारती छोटू पासवान मृगेंद्र कुमार हरीशचंद्र भारती शक्ति सिंह, टिंकू संजय दुबे, संजय साहू, टाटा शोभा हीरालाल यादव , गिरीश दिलीप दामले,अजय चौधरी नरेश संतोष सोनी अमोल साहु अनिल सिंह पीसी प्रसाद शिवनाथ साव सहित प्रमुख कार्यकर्त्ता है।