: बहुचर्चित श्रृंखला यादव जघन्य हत्याकाण्ड में आरोपी को मिली 20 साल की सजा
Wed, Feb 7, 2024
भिलाई।बहुचर्चित श्रृंखला यादव जघन्य हत्याकाण्ड में न्यायालय का फैसला आया है। जघन्य हत्या के आरोप में गिरफ्तार नाबालिग बंदी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा मिली है।
ज्ञात हो की थाना नेवई क्षेत्रान्तर्गत आरोपी व्दारा श्रृंखला यादव के सिर में कुल्हाड़ी मारकर जघन्य हत्या कर दी गई थी।गिरफ्तारी के दौरान बंदी नाबालिग था। दिनांक 03.06.2019 को 15.30 बजे शिवाजी छत्रपति नगर, गांधीपुरम मैत्रीकुंज, सीडीशुक्ला के घर के पास विधि से संघर्षरत बालक ईशान्त ठाकुर व्दारा कुमारी श्रृंखला यादव के सिर में कुदाल संघातिक वार कर किया गया।
घायल शरीर को सीडी शुक्ला के घर के पीछे ले जाकर फेंक दिया था। प्रकरण में थाना नेवई में थाना नेवई, जिला दुर्ग में अप.क.-143/2019 धारा 307, 201 भादवि कायम किया गया था। कुमारी श्रृंखला यादव की मृत्यु होने पर प्रकरण में धारा 302 भादवि का समावेश किया गया। प्रकरण में गिरफ्तार विधि का उल्लंघन करने वाले बालक ईशान्त ठाकुर पिता अशोक ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तारी के दौरान ईशान्त ठाकुर नाबालिग था, जिसे न्यायिक अभिरक्षा में रखा गयाथा । प्रकरण की सुनवाई पूर्ण कर माननीय न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.), दुर्गव्दारा आज दिनांक 07.02.2024 को सुनाये गये फैसले में बंदी ईशात ठाकुर, वर्तमान में उम्रलगभग 22 वर्ष को 302 भादवि के लिये 20 वर्ष सश्रम कारावास एवं 201 भादवि के लिये 01वर्ष का सश्रम कारावास की सजा एवं अर्थदण्ड दिये जाने का आदेश पारित किया गया है।इस प्रकरण में पुलिस व्दारा उच्च स्तरीय विवेचना एवं साक्ष्यों का संकलन कर चालानी कार्यवाही की गयी थी ।
: EOW ने कई कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ दर्ज किया FIR
Wed, Feb 7, 2024
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के चर्चित पीएससी घोटाले में बड़ा एक्शन हुआ है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने टामन सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव सहित कई कांग्रेसी नेताओं पर FIR दर्ज की है। भाजपा विधायक ननकी राम कंवर ने पीएससी परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत ईओडब्ल्यू से की थी, जिसके बाद अब लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी व तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव के खिलाफ एफआइआर दर्ज किया गया है।
सीएम साय ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि कांग्रेस शासन काल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के खिलाफ करीब दो वर्षों में 48 शिकायतें हुई हैं।
ये शिकायतें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य गृहमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंची है। अधिकांश शिकायतें राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से की गई है। इनमें रिश्तेदारों को नौकरी देने से लेकर परीक्षा में अनियमितता व भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा, परिणाम में गड़बडी, पक्षपातपूर्ण कार्य के आरोप लगाए गए हैं।
बता दें कि गौरतलब है कि 2021 में पीएससी ने 20 सेवाओं के लिए 171 पदों पर नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके लिए 1 लाख से अधिक युवाओं ने परीक्षा दिया। लेकिन मुख्य परीक्षा के लिए केवल 2565 युवाओं का चयन हुआ। इसके बाद 2022 में 26 मई से 29 मई के बीच मुख्य परीक्षा हुई। इसमें 509 युवाओं को इंटरव्यू के लिए चयन किया गया था।
: हाईकोर्ट से विधायक देवेंद्र यादव को झटका, आपराधिक जानकारी व संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया
Wed, Feb 7, 2024
भाजपा प्रत्याशी रहे प्रेमप्रकाश पांडेय की याचिक पर न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने नोटिस किया जारी
मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च को की गई त
य
CG Prime News@भिलाई. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में विधायक देवेंद्र यादव को एक चुनावी याचिका के संबंध में नोटिस जारी किया है। इसकी सुनवाई 20 मार्च को होगी।
विधायक
देवेंद्र
यादव
के
निर्वाचन
को
चुनौती
,
हाई
कोर्ट
से
लगा
झटका
,
प्रेम
प्रकाश
पांडेय
की
चुनाव
याचिका
पर
नोटिस
जारी
,
अगली
सुनवाई
20
मार्च
को
दरअसल विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा प्रत्याशी व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पांडेय ने चुनावी हलफनामें में देवेंद्र यादव पर अपनी संपत्ति और आपराधिक मामले छुपाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में वकील शैलेंद्र शुक्ला के माध्यम से याचिका दायर की थी।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला ने न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ के सामने अपना पक्ष रखा। डॉ. शुक्ला ने संपत्ति और आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने को जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन बताया। इस मामले में बुधवार को न्यायमूर्ति पांडेय ने विधायक देवेंद्र यादव को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई २० मार्च को तय की गई है।
जानिए.. क्या है जनप्रतिनिधि कानून 1951
जनप्रतिनिधि कानून 1951 के अनुसार चुनाव में उम्मीदवारी करने वाले व्यक्ति को अपने जीवन से संबंधित कानूनी जानकारियां हलफनामे में दर्ज करनी पड़ती है। यदि कोई प्रत्याशी अपने आपराधिक मामलों और संपत्ति की जानकारी को छुपाता है तो दोष सिद्ध होने पर उसका निर्वाचन अवैध हो सकता है।