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भिलाई का मशहूर मैत्री बाग जू : निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी, 60 साल पुराने जू में बड़े बदलाव की शुरुआत

Jagbhan Yadav

Mon, Nov 24, 2025

भिलाई का मैत्री बाग जू, छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध जू है, जिसे लोगों के मनोरंजन और वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य से विकसित किया गया था। इसकी शुरुआत 1965 में एक साधारण गार्डन के रूप में हुई, जब बच्चों के लिए झूले, फिसलपट्टी और घूमने-फिरने की जगह बनाई गई थी। कुछ वर्षों बाद ही इसमें नए प्राणी जोड़े गए और 1972 में इसे एक पूर्ण जू के रूप में स्थापित कर दिया गया।

समय बीतने के साथ यह जू लगातार बढ़ता और विकसित होता गया। 1976 से 1978 के बीच यहाँ शेर और बाघ भी लाए गए, जिससे यह जू पूरे राज्य के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गया। वर्तमान में मैत्री बाग जू लगभग 400 वन्य प्राणियों का घर है, जिनमें सांभर, हायना, लकड़बग्घा, लोमड़ी, लेपर्ड, नीलगाय, घड़ियाल सहित अन्य कई प्रजातियाँ शामिल हैं। करीब 140 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर में बोटिंग, टॉय ट्रेन, म्यूजिकल फाउंटेन, गार्डन और कई मनोरंजन सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।

हर साल करीब 12 लाख लोग यहाँ घूमने आते हैं, जिससे यह छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। लेकिन इतने बड़े आंकड़े के बावजूद जू की संचालित लागत उसके राजस्व से कहीं अधिक है। टिकट से मिलने वाली आय केवल लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक पहुँचती है, जबकि जू पर कुल खर्च हर साल करीब 4 करोड़ रुपये होता है। कर्मचारियों की संख्या 50 होने और रखरखाव में होने वाले भारी खर्च के चलते बीएसपी प्रबंधन के लिए इसे संभाल पाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

इसी आर्थिक बोझ को कम करने के लिए अब इस जू को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी तेज हो गई है। बीएसपी ने इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव (EOI) मंगाए हैं, जिससे पहली बार इस ऐतिहासिक जू का संचालन किसी निजी एजेंसी के हाथों होगा। यह छत्तीसगढ़ का पहला जू है, जिसे इस तरह से आउटसोर्स किया जा रहा है।

मैत्री बाग जू देशभर में सफेद बाघों के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है। 1990 में नंदन कानन से लाया गया पहला सफेद बाघ यहीं पाला गया था, और इसके बाद से लेकर अब तक कुल 19 सफेद बाघ यहाँ जन्म ले चुके हैं। इनमें से 13 को देश के विभिन्न राज्यों में भेजा गया है, जबकि 6 अभी भी मैत्री बाग में मौजूद हैं। देश में कुल 160 के लगभग सफेद बाघ हैं, जिनमें मैत्री बाग का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

निजीकरण की इस प्रक्रिया को कुछ लोग आधुनिक सुविधाओं के विकास का अवसर मान रहे हैं, वहीं कुछ नागरिकों के बीच चिंता भी है कि निजीकरण के बाद टिकट दरें बढ़ सकती हैं और आम लोगों के लिए जू की पहुँच पहले जैसी सहज नहीं रह पाएगी। इसके बावजूद यह कदम जू के रखरखाव, संरचना और भविष्य को लेकर एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

भिलाई का मैत्री बाग जू अपने 60 साल के इतिहास में पहली बार इस परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, और आने वाले समय में इसका रूप और सुविधाएँ दोनों ही काफी बदल सकती हैं।

Tags :

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