एएआई ने भारत में बढ़ते एल्युमीनियम आयात पर चिंता जताई है और सरकार से इस मुद्दे पर तुरंत दखल देने की माँग की है
डीपीआईआईटी और वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में एएआई ने एल्युमीनियम पर 15% आयात शुल्क लगाने की माँग की है
इसके अलावा, एएआई ने वैश्विक मानकों के अनुरूप स्क्रैप नियंत्रण और सर्कुलर इकोनॉमी सुधारों को लागू करने की अपील की है, ताकि भारत के औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया जा सके
रायपुर, अक्टूबर 2025
: एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) ने भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और वित्त मंत्रालय से अपील की है कि देश को संभावित एल्युमीनियम कमी से बचाया जाए, जैसे कि महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों को लेकर चिंता जताई जा रही है और इस क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश का रास्ता खोला जाए। उद्योग ने सरकार से आग्रह किया है कि भारत को वैश्विक एल्युमीनियम के
“डंपिंग ग्राउंड”
बनने से बचाया जाए, क्योंकि मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएँ लगातार बढ़ रही हैं। इस उद्देश्य से, एएआई ने अध्याय 76 के अंतर्गत आने वाले सभी एल्युमीनियम उत्पादों पर 15% बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सख्त गुणवत्ता नियम लागू करने की मांग की है।
एएआई की अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में असंतुलन और ज़्यादा उत्पादन वाले देशों से बढ़ते आयात भारत के एल्युमीनियम उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा के लिए खतरा बन रहे हैं। एल्युमीनियम को अब अमेरिका, यूरोपीय संघ, नाटो और भारत ने एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण धातु के रूप में मान्यता दी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, बुनियादी ढाँचे, एयरोस्पेस और ऊर्जा क्षेत्र के बदलाव में अहम भूमिका निभाती है।
अमेरिका ने एल्युमीनियम आयात पर शुल्क 10% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। वहीं, चीन ने अमेरिका से आने वाले एल्युमीनियम स्क्रैप पर 25% आयात शुल्क लगा दिया है और सख्त गुणवत्ता नियम बनाए हैं, यानि सिर्फ 91% या उससे ज़्यादा एल्युमीनियम सामग्री वाले स्क्रैप की ही अनुमति है। इसी बीच, यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (सीबीएएम) जैसे गैर-शुल्क नियम लागू किए हैं, जिनसे एल्युमीनियम आयात की लागत 7% से 60% तक बढ़ गई है।
भारत में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश से 4.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता (जो चीन के बाद दूसरी सबसे बड़ी है) तैयार की गई है और इससे 8 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिला है। इसके बावजूद, कम गुणवत्ता वाले एल्युमीनियम के आयात लगातार बढ़ रहे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में यह घरेलू माँग का लगभग 54% हो सकता है। पिछले 14 वर्षों में भारत में एल्युमीनियम की खपत 160% बढ़ी है, लेकिन आयात 250% और एल्युमीनियम स्क्रैप आयात 285% तक बढ़ गए हैं। यह असंतुलन दिखाता है कि वैश्विक व्यापार में गड़बड़ियों के कारण घरेलू निर्माताओं पर भारी दबाव है और यह स्थिति‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को कमजोर कर सकती है।
एएआई की मुख्य सिफारिशें:
सभी एल्युमीनियम उत्पादों (अध्याय 76) पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 15% तक बढ़ाया जाए, ताकि डंपिंग और अनुचित व्यापार पर रोक लगाई जा सके।
एल्युमीनियम स्क्रैप आयात के लिए बीआईएस मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नियम लागू किए जाएँ, जो एल्युमीनियम विजन दस्तावेज़ में बताए गए वैश्विक मानकों से मेल खाते हों, ताकि भारत कम गुणवत्ता वाले और खतरनाक स्क्रैप के डंपिंग ग्राउंड में न बदले।
Sensitivity: Public (C4)
महत्वपूर्ण कच्चे माल पर ड्यूटी ढाँचे को संतुलित किया जाए, ताकि घरेलू उत्पादन और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिल सके।
नियमों और नीतियों में एकरूपता लाई जाए, ताकि सर्कुलर इकोनॉमी (पुन: उपयोग आधारित अर्थव्यवस्था) को प्रोत्साहन मिले और पर्यावरण सुरक्षा मजबूत हो।
बिना नियमों के हो रहे एल्युमीनियम स्क्रैप आयात भारत के औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बढ़ता हुआ खतरा बन गए हैं। गुणवत्ता मानकों की कमी के कारण कम गुणवत्ता वाला और दूषित स्क्रैप बड़ी मात्रा में भारत आ रहा है, जिसमें अक्सर सीसा जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। ये स्क्रैप ज़्यादातर अमेरिका और यूरोपियन यूनियन जैसे देशों से आते हैं, जहाँ रीसाइक्लिंग के सख्त नियम लागू हैं। ऐसे निम्न-गुणवत्ता वाले स्क्रैप का इस्तेमाल घरेलू सामान, बिजली की तारों और बर्तनों में किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण को गंभीर खतरा होता है। साथ ही, यह उन भारतीय उत्पादकों को नुकसान पहुंचाता है जो बआईएस मानकों के तहत सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन करते हैं।
अगर ये कदम लागू किए जाते हैं, तो भारत औद्योगिक विकास के एक बड़े अवसर को खोल सकता है, जिससे आने वाले समय में 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित होगा और 2047 तक यह आँकड़ा 20 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच सकता है। इससे घरेलू एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता 2030 तक बढ़कर 9.2 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी, एक लाख से ज़्यादा नई नौकरियां पैदा होंगी, हजारों एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) को समर्थन मिलेगा और आयात पर निर्भरता में कमी आएगी।
एएआई ने भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और वित्त मंत्रालय से आग्रह किया है कि वे 2026–27 के आम बजट से पहले इन सुधारों को प्राथमिकता दें, ताकि भारत के एल्युमीनियम उद्योग की रक्षा की जा सके और सरकार के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके।