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निपुण भारत मिशन से छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाकों में ऐतिहासिक बदलाव, : 18 स्थानीय भाषाओं में दी जा रही प्राथमिक शिक्षा—लोकसभा में बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया मुद्दा

Jagbhan Yadav

Tue, Feb 3, 2026

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए निपुण भारत मिशन के अंतर्गत 18 स्थानीय भाषाओं और बोलियों में प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। यह कहना है सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल को, जिन्होंने सोमवार को लोकसभा में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सहित देश के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल से जुड़े शिक्षा सुधार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

अग्रवाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत निपुण भारत मिशन की प्रगति, क्षेत्रीय एवं भाषाई असमानताओं, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिलों में एफएलएन परिणामों, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता तथा 2026-27 तक सार्वभौमिक एफएलएन दक्षता प्राप्त करने की कार्यनीतियों पर केंद्र सरकार से जानकारी मांगी

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य, जहाँ जनजातीय समुदायों की बड़ी आबादी निवास करती है, वहाँ भाषा की बाधाएँ शिक्षा के मार्ग में एक बड़ी चुनौती रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, स्थानीय भाषाओं और बोलियों में प्रारंभिक शिक्षा, डिजिटल एफएलएन सामग्री, स्मार्ट क्लासरूम एवं टैबलेट जैसी सुविधाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही समान शैक्षिक अवसर सुनिश्चित कर सकता है।

छत्तीसगढ़ समेत देशभर में कक्षा स्तर पर भाषा मैपिंग, बहुभाषी शिक्षा का प्राथमिक कार्यान्वयन, शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक शिक्षण सामग्री, स्टोरी टेलिंग उत्सव, स्कूल म्यूजियम तथा मॉडल बहुभाषी स्कूलों की स्थापना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

सांसद बृजमोहन ने बताया कि समग्र शिक्षा के तहत छत्तीसगढ़ में जनजातीय क्षेत्रों सहित कुल 10,771 स्मार्ट कक्षाएँ स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 5,857 स्मार्ट कक्षाएँ वर्तमान में कार्यात्मक हैं। इसके साथ ही सीआईआईएल, मैसूर के सहयोग से छत्तीसगढ़ी, हल्बी और सुरगुजिहा भाषाओं में त्रिभाषी शब्दकोश एवं डिजिटल सामग्री भी विकसित की गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि , छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि निपुण भारत मिशन और समग्र शिक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य के दूरस्थ और अल्पसेवित जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार संभव हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2026-27 तक सार्वभौमिक एफएलएन दक्षता का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में भी मजबूती से प्राप्त होगा।

अग्रवाल ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मिशन केवल साक्षरता का नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को उनकी भाषा, संस्कृति और पहचान के साथ शिक्षा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। यह छत्तीसगढ़ के भविष्य को मजबूत नींव प्रदान करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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