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बस्तर के प्रगणक ने दुर्गम क्षेत्र में रचा इतिहास

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छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना का शंखनाद : बस्तर के प्रगणक ने दुर्गम क्षेत्र में रचा इतिहास

Jagbhan Yadav

Sun, May 3, 2026

रायपुर। भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में शुक्रवार से आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। इस राष्ट्रव्यापी महाभियान के सफल संचालन हेतु राज्य में 51,300 प्रगणक एवं 9,000 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गये हैं, जो 30 मई तक घर-घर जाकर डेटा संकलन का कार्य संपन्न करेंगे।
बस्तर की मिसाल: दुर्गम क्षेत्र गाटम में पहले ही दिन कार्य पूर्ण

जनगणना कार्य के प्रथम दिवस ही बस्तर जिले के तोकापाल तहसील स्थित अत्यंत दुर्गम क्षेत्र के ग्राम 'गाटमÓ से एक उत्साहजनक खबर आई। यहाँ के प्रगणक ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन ग्राम का कार्य पूर्ण कर लिया। प्रगणक की इस उपलब्धि ने प्रशासनिक स्तर पर न केवल प्रशंसा बटोरी है, बल्कि पूरे राज्य के फील्ड कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह का संचार किया है। जनगणना निदेशालय ने इसे राष्ट्र सेवा के प्रति एक उत्कृष्ट मिसाल बताया है।
सख्त रुख: ड्यूटी से नदारद 44 कर्मियों पर गाज
एक ओर जहाँ निष्ठा की मिसाल पेश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही बरतने वालों पर प्रशासन सख्त है। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में जनगणना ड्यूटी में लगाए गए 44 कर्मचारी कार्यस्थल पर अनुपस्थित पाए गए, जिन्हें नगर निगम आयुक्त द्वारा तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। संबंधित प्रशासन द्वारा इन कर्मियों के विरुद्ध जनगणना अधिनियम 1948 एवं छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इंकार करना इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।
डिजिटल जनगणना और स्व-गणना की सफलता
देश में पहली बार जनगणना पूर्णत: डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिसमें प्रगणक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से 33 प्रश्नों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में आम नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक उपलब्ध स्व-गणना विकल्प के माध्यम से 1,49,862 परिवारों ने वेब पोर्टल पर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर अपनी सीधी भागीदारी सुनिश्चित की है।
गोपनीयता की पूर्ण गारंटी
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णत: गोपनीय रखी जाएंगी। इस जानकारी का उपयोग किसी भी प्रकार की पुलिस जांच, टैक्स निर्धारण या कानूनी साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता और न ही यह सूचना का अधिकार के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इसका एकमात्र उद्देश्य भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्माण में सहयोग करना है।

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