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पीएम मोदी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के भाषण को ‘प्रेरणादायक’ बताया औ : पीएम मोदी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के भाषण को ‘प्रेरणादायक’ बताया और राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान की सराहना की

Jagbhan Yadav

Thu, Oct 2, 2025

मोहन भागवत ने कहा कि ‘संघ अपनी दृष्टि और परंपरा से चलते हुए 100 साल पूरे कर चुका है। स्वयंसेवक और समाज के संकलित अनुभव संघ का चिंतन है। सारी दुनिया आगे चली गई है, हम भी आगे चले गए हैं। अब अगर हम तुरंत पीछे आएंगे तो गाड़ी उलट जाएगी। ऐसे में हमें धीरे-धीरे परिवर्तन करने होंगे और अपना खुद का विकास पथ बनाकर दुनिया के सामने रखेंगे तो सही विकास होगा…

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयदशमी पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के भाषण को ‘प्रेरणादायक’ बताया और राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान की सराहना की। नागपुर में भागवत ने हिंदू समाज की एकता, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया और भारत की वैश्विक संभावनाओं की बात की। आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी और अब यह देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयदशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के भाषण की सराहना की और इसे प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस भाषण में भारत की अंतर्निहित क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही गई है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, ‘परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का प्रेरणादायक भाषण, जिसमें आरएसएस के राष्ट्र निर्माण में योगदान पर प्रकाश डाला गया और हमारी धरती की अंतर्निहित क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया, जिससे पूरी पृथ्वी को लाभ मिलेगा।’ मोदी 1980 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पहले आरएसएस प्रचारक थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर बधाई दी। सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा कि ‘आज से 100 साल पहले विजयादशमी के दिन ही समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। लंबे कालखंड के दौरान असंख्य स्वयंसेवकों ने इस संकल्प को साकार करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसे लेकर मैंने अपने विचारों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।

आरएसएस प्रमुख ने अपने भाषण में क्या कहा?
गुरुवार को नागपुर में अपने भाषण में आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हिंदू समाज की ताकत और चरित्र एकता की गारंटी देते हैं और समुदाय में ‘हम और वे’ की अवधारणा कभी मौजूद नहीं रही। उन्होंने स्वदेशी (उत्पादों का उपयोग) और स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) का समर्थन किया और कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं ने उनकी भारत के साथ मित्रता की प्रकृति और सीमा को बता दिया है।

आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयदशमी के दिन ही हुई थी और यह अपने शताब्दी वर्ष का जश्न मना रहा है। आरएसएस कुछ लोगों के साथ शुरू हुआ था। लेकिन अब  यह देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन बन चुका है। भाजपा वैचारिक रूप से इस हिंदुत्ववादी संगठन से प्रेरित है।

संघ प्रमुख ने कहा कि प्रचलित अर्थ प्रणाली के अनुसार, देश आर्थिक विकास कर रहा है। लेकिन प्रचलित अर्थ प्रणाली के कुछ दोष भी सामने आ रहे हैं। इस व्यवस्था में शोषण करने के लिए नया तंत्र खड़ा हो सकता है। पर्यावरण की हानि हो सकती है। हाल ही में अमेरिका ने जो टैरिफ नीति अपनाई, उसकी मार सभी पर पड़ रही है। ऐसे में हमें मौजूदा अर्थ प्रणाली पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहिए। निर्भरता मजबूरी में न बदलनी चाहिए। इसलिए निर्भरता को मानते हुए इसको मजबूरी न बनाते हुए जीना है तो स्वदेशी और स्वावलंबी जीवन जीना पड़ेगा। साथ ही राजनयिक, आर्थिक संबंध भी दुनिया के साथ रखने पड़ेंगे, लेकिन उन पर पूरी तरह से निर्भरता नहीं रहेगी।

संघ प्रमुख ने कहा कि प्रजातांत्रिक मार्गों से ही परिवर्तन आता है। हिंसा से ऊथल-पुथल आती है, लेकिन पूरी तरह से परिवर्तन नहीं हुआ। हाल के समय में विभिन्न देशों में कथित क्रांतियां हुईं, लेकिन कहीं कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हो सका। हमारे पड़ोसी देशों में हिंसक ऊथल-पुथल होना हमारे लिए चिंता का विषय है। हमारा पड़ोसी देशों के साथ आत्मीयता का संबंध है। इससे चिंता होती है।

मोहन भागवत ने कहा कि ‘आज पूरी दुनिया में अराजकता का माहौल है। ऐसे समय में पूरी दुनिया भारत की तरफ देखती है। आशा की किरण ये है कि देश की युवा पीढ़ी में अपने देश और संस्कृति के प्रति प्रेम बढ़ा है। समाज खुद को सक्षम महसूस करता है और सरकार की पहल से खुद ही समस्याओं का निदान करने की कोशिश कर रहा है। बुद्धिजीवियों में भी अपने देश की भलाई के लिए चिंतन बढ़ रहा है।’

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