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NIA का खौफनाक खुलासा! : इन देशों में बेचे जा रहे भारतीयों के अंग, जानिए कौन है इस पीछे का मास्टरमाइंड?

Jagbhan Yadav

Fri, Dec 19, 2025

केरल में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित अंग तस्करी गिरोह का खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, यह गिरोह अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भारत से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विदेश भेज रहा था। ईरान के अलावा वर्ष 2025 में ओडिशा के दो लोगों को ताजिकिस्तान भेजे जाने की भी पुष्टि हुई है, जहां उनकी किडनी अमीर लोगों में प्रतिरोपित की गई। एनआईए ने केरल की एक विशेष अदालत में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी और मुख्य आरोपी मधु जयकुमार की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग की। जयकुमार केरल के पलारिवट्टोम का निवासी है और लंबे समय से फरार चल रहा था।

कोच्चि एयरपोर्ट से शुरू हुई जांच
यह मामला 18 मई 2024 को सामने आया था, जब सबिथ नामक व्यक्ति को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने रोका। उस पर एक संगठित अंग तस्करी गिरोह से जुड़े होने का संदेह था। इसके बाद की जांच में साजिथ और विजयवाड़ा निवासी बेलमकोंडा राम प्रसाद की गिरफ्तारी हुई। आरोप है कि ये लोग अवैध अंग प्रतिरोपण के लिए दानदाताओं और प्राप्तकर्ताओं को ईरान के अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था करते थे।

27 ट्रांसप्लांट और 11 डोनर्स की पुष्टि
एनआईए के अनुसार, एक साल से अधिक समय तक फरार रहे जयकुमार को 7 नवंबर को नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने उन 27 लोगों के नाम उजागर किए, जिन्होंने ईरान में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। इसके अलावा 11 किडनी दानदाताओं की पहचान भी सामने आई है।

ताजिकिस्तान तक फैला नेटवर्क
हलफनामे में कहा गया है कि केस दर्ज होने के बाद भी गिरोह की गतिविधियां नहीं रुकीं। वर्ष 2025 में ओडिशा के दो व्यक्तियों को ताजिकिस्तान भेजा गया, जहां आरोपियों के जरिए उनकी किडनी अमीर मरीजों में प्रतिरोपित की गई। एनआईए अब इस अवैध अंग व्यापार से जुड़े पैसों की ट्रेल की जांच कर रही है।

हिरासत बढ़ाने की मांग
एनआईए ने अदालत को बताया कि जयकुमार से अन्य आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले बैंक खातों के विवरण, तस्वीरों और वीडियो के संबंध में गहन पूछताछ की जरूरत है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसका संबंध अन्य अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी गिरोहों से तो नहीं है। अदालत ने 15 दिसंबर को जयकुमार को तीन दिन की एनआईए हिरासत में भेजा था, जो 18 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है। सूत्रों के अनुसार, ओडिशा के उन दो दानदाताओं की तलाश जारी है, जिन्हें ताजिकिस्तान भेजा गया था।

गरीबों को लालच, वादा पूरा नहीं
एनआईए के आरोपपत्र में कहा गया है कि दानदाता अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से थे, जिन्हें मोटी रकम का लालच दिया गया। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें वह पैसा भी नहीं दिया गया, जिसका वादा किया गया था। यह मामला अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी नेटवर्क की गंभीरता और गरीबों के शोषण की भयावह तस्वीर पेश करता है, जिस पर अब जांच एजेंसियां शिकंजा कस रही हैं।

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