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छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय परिषद की अध्यक्ष प्रो. प्रीति शर्मा के : मार्गदर्शन में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन

Jagbhan Yadav

Mon, Feb 2, 2026

कुम्हारी।छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय परिषद तथा स्वर्गीय बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय, कुम्हारी के संयुक्त तत्वावधान में “वैश्वीकरण एवं उभरता पर्यावरणीय संकट : नागरिक समाज की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 30 एवं 31 जनवरी को बरडिया भवन, कुम्हारी में गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

संगोष्ठी के प्रथम दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप अतिथियों को पर्यावरण-अनुकूल पौधे भेंट किए गए। महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संगोष्ठी की संरक्षक डॉ. श्रीमती सोनिता सत्संगी ने अपने स्वागत उद्बोधन में समाजशास्त्र और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए स्वर्गीय प्रो. जी. पी. शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अध्यक्षीय उद्बोधन में छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय परिषद की अध्यक्ष प्रो. प्रीति शर्मा ने समाज एवं पर्यावरण के गहन अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में नागरिक समाज की भूमिका और भी अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक चेतना, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के बिना पर्यावरण संरक्षण की कल्पना अधूरी है। उनका वक्तव्य वैचारिक रूप से समृद्ध होने के साथ-साथ युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं दिशानिर्देशक सिद्ध हुआ।

परिषद के सचिव डॉ. एल. एस. गजपाल ने वैश्वीकरण से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर विद्वानों का ध्यान आकृष्ट करते हुए सामाजिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष व्याख्यान सत्र में प्रो. मनीष के. वर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. एम. नायक तथा मुख्य वक्ता डॉ. के. सुब्रमण्यम ने आधुनिक जीवनशैली, औद्योगिक गतिविधियों एवं उनसे उत्पन्न पर्यावरणीय असंतुलन पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन किया गया तथा डॉ. सुनीता अग्रवाल की पुस्तक का विधिवत विमोचन भी संपन्न हुआ। द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष बल दिया।

संगोष्ठी का द्वितीय दिवस, 31 जनवरी, पूर्णतः स्वर्गीय प्रो. जी. पी. शर्मा की स्मृति को समर्पित रहा। इस अवसर पर उनके परिवारजनों की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को भावनात्मक गरिमा और आत्मीयता से भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. महेश शुक्ला के प्रेरक वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्होंने स्वर्गीय प्रो. शर्मा के जीवन-दर्शन, अकादमिक यात्रा और उनकी अदम्य जिजीविषा पर प्रकाश डाला।

इस सत्र में सुचित्रा शर्मा, डॉ. एल. एस. गजपाल एवं प्रो. प्रीति शर्मा ने स्वर्गीय प्रो. जी. पी. शर्मा के जीवन, अनुशासन, शिक्षकीय दृष्टि और शैक्षणिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. प्रीति शर्मा ने उन्हें अनुशासन और मूल्यनिष्ठा का प्रतीक बताते हुए कहा कि वे अपने आप में एक संस्था थे तथा उन्हें “भीष्म पितामह” की संज्ञा दी।

तत्पश्चात उनके छोटे भाई मोहन शर्मा ने जीवन से जुड़े स्मरणीय प्रसंग साझा किए, जबकि उनकी बहन दुर्गा शर्मा की भावपूर्ण गीत प्रस्तुति ने सभागार को भाव-विभोर कर दिया। इस सत्र में ज्योति सिंह, डॉ. कविता मेश्राम, डॉ. महेंद्र शर्मा एवं हर्ष पांडे द्वारा प्रस्तुत शोध-पत्रों में विषय की गंभीरता और शोधात्मक दृष्टि स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। कार्यक्रम की रिपोर्टिंग एवं डाटा प्रस्तुति सुनीता अग्रवाल द्वारा की गई।

समापन समारोह में विद्यार्थियों द्वारा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित मनोहारी नृत्य प्रस्तुति दी गई। संगोष्ठी का औपचारिक समापन वक्तव्य महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती सोनिता सत्संगी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने संगोष्ठी से प्राप्त निष्कर्षों तथा भावी सामाजिक एवं पर्यावरणीय दायित्वों पर प्रकाश डाला।

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