: ननों की गिरफ्तारी के बाद राजनीति बवाल: ननो से मिलने सांसद पहुंचे जेल, लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश, दुर्ग से दिल्ली तक कांग्रेस का विरोध
Jagbhan Yadav
Tue, Jul 29, 2025
दुर्ग। धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में दो ननो गिरफ्तारी के बाद अब राजनीति बवाल हो गया है. ननों की गिरफ्तारी के बाद इस मामले को संसद में उठाया गया.वहीं छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने ये साफ किया कि प्रदेश में धर्मांतरण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वहीं आज मंगलवार को केंद्रीय जेल दुर्ग में बंद ननों से मिलने के लिए इंडिया गठबंधन के विधायक और सांसद पहुंचे. जिसमें केरल के विधायक रोजी एम जॉन, छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सह प्रभारी जरिता लेतफलांग समेत चार सांसदो ने जेल में ननो से मुलाकात की। इन नेताओं ने ननों से मुलाकात के बाद एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसे कांग्रेस हाईकमान को सौंपा जाएगा।
ननो की जमानत याचिका खारिज: जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार दोनों नन को अदालत में पेश किया गया। जहां न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी दुर्ग के द्वारा दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दिया है। न्यायाधीश ने कहा कि गंभीर प्रकृति के आरोप है जिसके कारण इन्हें जमानत नहीं दी जा सकती है। उन्हें 8 अगस्त तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

ननों से मिलने वाले लोगों में कांग्रेस सांसद सप्तगिरी उल्का, केरल के नेता बेनी बेहनान, फ्रांसिस जॉर्ज, एनके प्रेमचंदन और कांग्रेस अल्पसंख्यक नेता अनिल ए थॉमस आए हैं। कांग्रेस सांसदों समेत प्रतिनिधिमंडल में जेल में जाकर ननों से मुलाकात की. साथ ही ननों को निर्दोष बताकर की रिहाई की मांग की गई है।
सांसद फ्रांसिस जॉर्ज ने कहा कि दोनों नन निर्दोष हैं, उन्हें जबरन फंसाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जिन युवतियों को उनके साथ ले जाया जा रहा था, वे पहले से ही ईसाई धर्म अपना चुकी थीं और जॉब के लिए जा रही थीं. यह मामला धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक सामाजिक भ्रम है. फ्रांसिस ने कहा कि दो ननों को पुलिस ने गलत धाराओं में गिरफ्तार किया है. जबरन धर्मांतरण नॉन बेलेबल है, इसलिए जान बूझकर ननों को इस मामले में फंसाया गया. जबकि दोनों नन यहां पर युवतियों को रोजगार देने के लिए लेने आई थी.इस गिरफ्तारी का हम पूरी तरह से विरोध करते हैं।
सांसद जे. फ्रांसिस ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कौन लोग इसमें शामिल है. लेकिन हमने जो वीडियो देखा उसमें ननों को चारों ओर से घेरकर कुछ लोग नारेबाजी कर रहे थे.जो बजरंग दल के बताए जा रहे हैं.ये बजरंग दल बीजेपी और आरएसएस से ही संबंधित है.जिस ह्यूमन ट्रैफिकिंग की बात की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं के जेल जाने से पहले पूर्व विधायक अरुण वोरा के निवास पर सभी नेताओं ने बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे चाहते हैं कि निर्दोषों को न्याय मिले तथा जल्द रिहा किया जाए।
ननों की गिरफ्तारी की आंच अब दिल्ली भी पहुंच गई है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने मंगलवार को लोकसभा में छत्तीसगढ़ में दो कैथोलिक ननों की “अवैध गिरफ्तारी और भीड़ हिंसा” पर चर्चा के लिए एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया।
बता दे कि लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर x पर लिखे…छत्तीसगढ़ में दो कैथोलिक ननों को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया – यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा-आरएसएस का गुंडा राज है।यह एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है: इस शासन में अल्पसंख्यकों का व्यवस्थित उत्पीड़न। यूडीएफ सांसदों ने आज संसद में विरोध प्रदर्शन किया। हम चुप नहीं बैठेंगे। धार्मिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक अधिकार है। हम उनकी तत्काल रिहाई और इस अन्याय के लिए जवाबदेही की मांग करते हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने इसको एक्स पर लिखे…नारायणपुर की तीन बेटियों को नर्सिंग की ट्रेनिंग दिलाने और उसके पश्चात जॉब दिलाने का वादा किया गया था। नारायणपुर के एक व्यक्ति के द्वारा उन्हें दुर्ग स्टेशन पर दो ननो को सुपुर्द किया गया, जिनके द्वारा उन बेटियों को आगरा ले जाया जा रहा था। इसमें प्रलोभन के माध्यम से ह्यूमन ट्रैफिकिंग करके मतांतरण किए जाने की कोशिश की जा रही थी। यह महिलाओं की सुरक्षा से सबंधित गंभीर मामला है। इस मामले में अभी जांच जारी है। प्रकरण न्यायालीन है और कानून अपने हिसाब से काम करेगा। छत्तीसगढ़ एक शांतिप्रिय प्रदेश है जहाँ सभी धर्म-समुदाय के लोग सद्भाव से रहते हैं। हमारी बस्तर की बेटियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रूप देना बेहद दुर्भाग्यजनक है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने लिखा कि ये कानून व्यवस्था का खुला उल्लंघन है, ऐसी घटनाएं राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए असुरक्षा का वातावरण बनाती हैं. यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि हाल के वर्षों में इस तरह के सुनियोजित हमले बढ़ते जा रहे हैं. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस ने पीड़ितों को हिरासत में रखा. जबकि उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे. यदि इस घटना में शामिल तत्वों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह राज्य में कानून के शासन और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा।

जानिए क्या है पूरा मामला : 25 जुलाई को जीआरपी चौकी दुर्ग (रेल्वे थाना भिलाई के अंतर्गत) को सूचना दी गई, कि बस्तर क्षेत्र के तीन लड़कियों को उनके क्षेत्र से बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन एंव मानव तस्करी कर दुर्ग रेल्वे स्टेशन से 02 ईसाई नन प्रीति मैरी एवं वंदना फ्रांसिस को आगरा भेजा जा रहा है। थाना भिलाई, शासकीय रेल पुलिस ने प्रकरण में अपराध क्रमांक 60/25 धारा 143 बीएनएस एवं धारा 4 छ.ग. धर्म स्वतंत्रय अधिनियम 1968 का अपराध प्रीति मैरी, वंदना फ्रासिस एवं सुखमत मंडावी के विरुद्ध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर धर्मांतरण और मानव तस्करी को लेकर हंगामा हुआ. बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने 2 नन के साथ एक युवक और 3 आदिवासी युवतियों को घेरकर रोका. बजरंग दल ने आरोप लगाए थे कि युवतियों को बहला-फुसलाकर उत्तर प्रदेश के आगरा ले जाया जा रहा था. जहां उनके धर्मांतरण की योजना थी. बजरंग दल के हंगामे के बाद दो नन और एक युवक को जीआरपी ने गिरफ्तार किया था. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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