छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल अभियान में कांग्रेस दो गुट में बंट गई है.
रायपुर:
छत्तीसगढ़ कांग्रेस से कुछ नेता सरकार के नक्सल के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की सराहना कर रहे हैं तो कुछ नक्सल अभियान पर शंका जाहिर कर रहे हैं. एक धड़ा सरकार के पक्ष में और दूसरा धड़ा परंपरागत विपक्षी पार्टी की भूमिका निभा रहा है. उनका आरोप रहा है कि बस्तर में नक्सल ऑपरेशन के दौरान बेगुनाह, निर्दोष ग्रामीणों को मारा जा रहा है. कुछ कांग्रेसियों का यह भी आरोप है कि भाजपा अपने मित्रों के लिए उन क्षेत्रों में रेट कारपेट बिछाने की तैयारी कर रही है.
नक्सल ऑपरेशन में कांग्रेस क्यों बंटी?:
हाल ही में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने सरकार की तुलना भगवान राम से की थी और नक्सलियों को रावण बताया था. सिंहदेव ने कहा था कि प्रभु श्री राम ने रावण के साथ जो किया वैसा ही अब सरकार नक्सलियों के साथ कर रही है. सिंहदेव के बयान का समर्थन उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने किया. उन्होंने इसकी सराहना की थी. विजय शर्मा ने कहा "मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं. सुरेंद्र शर्मा और टीएस सिंहदेव ने नक्सल मोर्चे पर सफलता को लेकर बयान दिया है. उसे मैंने देखा है. ऐसे मुद्दों पर सबको साथ होना चाहिए, फिर सरकार चाहे किसी की भी हो."
कांग्रेस का भाजपा पर आरोप:
फरवरी 2025 में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कुछ वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में भाजपा सरकार के खिलाफ एक आरोप पत्र जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले 1 साल में कोई भी स्पष्ट नक्सल नीति नहीं बनी है, रोज नक्सली घटनाएं हो रही है.
विधानसभा में भी उठा नक्सल मामला:
इतना ही नही दिसंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान नक्सल मामले पर नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने भी गंभीर आरोप लगाया था. महंत ने कहा था कि भरमार बंदूकें रखकर आम लोगों को नक्सली साबित किया जा रहा है. महंत ने सरकार से पूछा कि प्रदेश पुलिस शस्त्रागार में कितने भरमार हैं ? इस पर सदन में सवाल का जवाब देते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, नक्सली घटनाओं में आम नागरिकों के मारे जाने की पूरी सूची दे दी गई है. मारे गए नक्सलियों से फिर से भरमार जब्त हुए है. गृहमंत्री ने कहा कि ऐसे सवाल उठाकर विपक्ष नक्सल मोर्चे पर लड़ रहे जवानों का हौसला कम करने का काम करती है.
चरणदास महंत ने नक्सल मामले पर यह भी कहा था "उन्हें मारिए, उन्हें भगाइए, कोई भी उनके साथ नहीं है. मगर हम क्यों भाग रहे हैं. इसलिए कि बस्तर में शांति हो और वहां जो खनिज पदार्थ हो उसका दोहन नहीं हो रहा है, उसका दोहन करें. अब इतनी कृपा मत करिए कि आप अडानी को बुला लो और सारा बस्तर उन्हें श्राप दें."
"हमने काम किया बीजेपी ले रही झूठा श्रेय":
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी नक्सल मामले को लेकर भाजपा सरकार को घेरा है. बघेल ने कहा कि उनके कार्यकाल में पांच जो काम किया गया, बस्तर में विकास किया, उसी का नतीजा है कि नक्सली कुछ जगह में सिमट कर रह गए. भूपेश ने छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार पर झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाया. भूपेश बघेल ने कहा कि रमन सिंह के कार्यकाल में बस्तर के 600 गांव आदिवासियों से खाली हो गए थे. हमारी सरकार ने 600 गांव नक्सल मुक्त कराया.
घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर हमने कैंप खोला, सड़कें बनाई, राशन कार्ड दिए, जॉब कार्ड बांटे, पीडीएस खोला, आंगनबाड़ी केंद्र खोले, स्कूल खोलें, हाट बाजार क्लिनिक शुरू किया. यही कारण है कि 5 साल पहले पंचायती राज का चुनाव हुआ लेकिन उसके पहले वहां काला झंडा 15 अगस्त और 26 जनवरी को फहराया जाता था. वह सब बंद हो गया. आदिवासियों को हमने अधिकार संपन्न बनाया, जल जंगल जमीन दिया. उसके कारण नक्सली बीजापुर में अबूझमाड़ में सिमट गए. सारी सुविधा हमने की, अब वे श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे हैं.-
भूपेश बघेल, पूर्व सीएम, छत्तीसगढ़
बस्तर में उद्योगपति दोस्तों के लिए रेड कारपेट बिछाने की कोशिश:
गृह विभाग के पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रहने वाला कोई भी व्यक्ति कोई भी राजनीतिक दल नक्सलवाद को खत्म करने की की ही बात करेगा. उसके खिलाफ बात नहीं करेगा. हमारे सैनिक हमारे फोर्स के लोग लगातार मेहनत कर रहे हैं, नक्सलियों को मार रहे हैं, उनकी बहादुरी को हम नमन करते हैं. हम उस पर कभी कोई सवाल नहीं उठाते हैं.
प्रश्न चिन्ह भाजपा सरकार की सोच पर उठा रहे हैं, हमें शंका है कि क्या यहा उद्योगपति दोस्तों के लिए रेड कारपेट बिछाने का काम किया जा रहा है. क्योंकि वह तमाम क्षेत्र खनिज से भरा हुआ है. क्या उनके लिए यह व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा जो बेगुनाह लोगों की मौत हो रही है उस पर भी हम शंका जाहिर कर रहे हैं. -
विकास उपाध्याय, पूर्व संसदीय सचिव
विकास उपाध्याय ने कहा कि टीएस सिंहदेव ने कहा कि पहले भी ऐसा होता था संधि के लिए बुलाते थे बाद में संधि नहीं होती थी, उन्हें खत्म किया जाता था. आज भी स्थिति पूरे प्रदेश में बनी हुई है, हर एक आदमी इस बात को सोच रहा है कि 15 साल पहले आपने जो नहीं किया, कांग्रेस इसकी भुक्तभोगी है. नक्सलबाद से यदि सबसे ज्यादा किसी को नुकसान हुआ है तो कांग्रेस का हुआ है. कांग्रेस पार्टी की सर्वोच्च लीडरशिप नक्सलवाद से खत्म हो गई. हम नक्सलवाद को खत्म करने के समर्थन में है जो इसके लिए काम करेगा उसके साथ खड़े रहेंगे, लेकिन उसकी मंशा साफ होनी चाहिए.
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग अग्रवाल का कहना है कि जो राष्ट्र के समर्थन में होगा, जो राष्ट्रहित की बात सोचेगा, जो आदिवासियों की बात सोचेगा, वह देश के सर्वोच्च आंतरिक खतरे नक्सलवाद के खतरे को समाप्त करने के साथ रहेगा. जो इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि क्या नक्सलवाद खत्म नहीं होना चाहिए, जो पूर्ववर्ती सरकार थी. क्या उसमें नक्सलवाद को समर्थन देने की नीति थी. कांग्रेस ने अपना शीर्ष नेतृत्व खोया है, उसके बाद भी संविधान का विरोध समझ से परे हैं. इस बात को समझना चाहिए कि गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 की डेट लाइन तय कर दी है. विष्णुदेव साय इसके लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं और गृहमंत्री विजय शर्मा नक्सल सफाये के लिए आगे बढ़ रहे हैं.
अब तो सिर्फ नक्सलवाद का सफाया नहीं हो रहा, बल्कि उस क्षेत्र में विकास का काम शुरू किया जा रहा है. मुख्यमंत्री दो दिन उसक्षेत्र में रहे. कई योजना का उद्घाटन किया. बस्तर का विकास और नक्सलवाद का सफाया यह तय है. जो लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए इसका विरोध करना चाहते हैं, इसे जनता समझती है, कौन जानता और आदिवासियों के विरोध में है-
अनुराग अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
"छत्तीसगढ़ को मिला डबल इंजन का फायदा":
वही राजनीतिक जानकार एवं वरिष्ठ पत्रकार उचित शर्मा का कहना है कि नक्सल खत्म हो रहा है, यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है. नक्सल को लेकर केंद्र ओर राज्य सरकार काम कर रही है, यह समस्या सभी के लिए थी, चाहे फिर कोई भी राजनीतिक दल हो. शर्मा ने कहा कि साय सरकार को डबल इंजन की सरकार होने का फायदा मिल रहा है. अमित शाह ने 16 माह में नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया था इसमें डबल इंजन का फायदा मिल रहा है. यह अच्छी बात है. इस पर राजनीति नहीं होना चाहिए, उसका स्वागत करना चाहिए.
जो संभावना जताई जा रही है कि बस्तर की बुलंद आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, इसका भी कुछ न कुछ कारण नजर आ रहा हैं, चीजे उतनी साफ नहीं है जितनी दिखाई जा रही है. इसके पीछे भी कई राजनीतिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं.-
उचित शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार
"नक्सल मामले पर कांग्रेस बंटी":
उचित शर्मा ने कहा "जिस तरह से सुरेंद्र शर्मा ने नक्सल अभियान का समर्थन किया और उपमुख्यमंत्री ने उनकी तारीफ की. इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होना चाहिए. अब इस मामले को लेकर क्रेडिट लेने की बात सामने आ रही हैं. मैं नहीं कहता कि किसी भी मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद को खत्म करने की कोशिश नहीं की, चाहे फिर वो डॉक्टर रमन सिंह हो, भूपेश बघेल हो, या फिर विष्णुदेव साय हो, किसी को केंद्र का साथ मिला, लेकिन इस मुद्दे को लेकर सभी गंभीर थे. वर्तमान की बात की जाए तो जिस तरीके से इस मामले को लेकर कांग्रेस में बातें आ रही है, स्वाभाविक दिख रहा है कि उसमें दो फाड़ है."
"नक्सल समस्या खत्म करने सभी सरकारों ने किया प्रयास":
वहीं नक्सल मामले पर भाजपा के श्रेय लिए जाने के भूपेश बघेल के बयान पर उचित शर्मा ने कहा कि इस पूरे अभियान का श्रेय कांग्रेस को भी जाता है, क्योंकि नक्सल समस्या धीरे-धीरे खात्मे की ओर जा रही है. इसके लिए सभी सरकार ने प्रयास किया है. इसमें भूपेश बघेल के सरकार की उपलब्धियां को भी नकारा नहीं जा सकता. इस पूरे मामले को लेकर किसी एक व्यक्ति को श्रेय देना उचित नहीं होगा.