75 साल के रिश्तों के बीच पीएम मोदी का जॉर्डन दौरा: : व्यापार, IMEC और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
Jagbhan Yadav
Mon, Dec 15, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15–16 दिसंबर को जॉर्डन के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों को 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वर्ष 1950 में दोनों देशों ने औपचारिक रूप से कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे और वर्ष 2025 में यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का जॉर्डन दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भारत–जॉर्डन संबंधों को व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग के नए स्तर तक ले जाने की पहल माना जा रहा है। दौरे के दौरान पीएम मोदी की जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ विस्तृत बातचीत प्रस्तावित है, जिसमें राजनीतिक सहयोग, रक्षा, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
🔷 आर्थिक और व्यापारिक संबंध
आर्थिक मोर्चे पर भारत और जॉर्डन के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2023–24 में दोनों देशों के बीच लगभग 26,033 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपये रहा।
दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर (लगभग 45,275 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है।
जॉर्डन भारत के लिए उर्वरक और रॉक फॉस्फेट का एक प्रमुख स्रोत है। भारत अपने कुल रॉक फॉस्फेट आयात का लगभग 40 प्रतिशत जॉर्डन से करता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम उत्पाद, अनाज, रसायन, मांस, ऑटो पार्ट्स और औद्योगिक सामान आयात करता है।
इसके अलावा भारतीय कंपनियां जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी हैं, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और गहरा हुआ है।
🔷 IMEC कॉरिडोर पर अहम चर्चा
इमेज में दिए गए विवरण के अनुसार, इस दौरे के दौरान इंडिया–मिडिल ईस्ट–यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर भी चर्चा होने की संभावना है। इस कॉरिडोर में भारत, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल, ग्रीस, इटली, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं।
IMEC का उद्देश्य भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच एक तेज, सुरक्षित और किफायती व्यापार मार्ग तैयार करना है। इसके तहत समुद्री और रेल मार्गों के माध्यम से माल ढुलाई को आसान बनाया जाएगा।
परियोजना के अनुसार भारत से सामान पहले समुद्री मार्ग से यूएई या सऊदी अरब पहुंचेगा, वहां से रेल मार्ग के जरिए जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप भेजा जाएगा। IMEC की कुल लंबाई लगभग 6,000 किलोमीटर मानी जा रही है, जिसमें करीब 3,500 किलोमीटर समुद्री मार्ग शामिल है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस कॉरिडोर के पूरा होने से भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने में 40 प्रतिशत समय की बचत और 30 प्रतिशत तक लागत में कमी आएगी। IMEC को चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
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