: संस्कार और लालन-पोषण ही बेटियों को बनाता है सक्षम
Jagbhan Yadav
Wed, Mar 13, 2024
संस्कार और लालन-पोषण ही बेटियों को बनाता है सक्षम
रायपुर
जनकनंदिनी राजा जनक ने अपनी बेटी सीता को महलों में बड़े लाड़ प्यार से लालन-पालन किया। उनका विवाह भी अयोध्या के दशरथनंदन श्रीराम के साथ किया, ताकि उनकी बेटी महलों में पली बड़ी तो महलों में ही रहे। लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि शादी भी महलों में हुई, उनका आधे से ज्यादा जीवन वनवास में बीता। इसे कहते हैं किस्मत का खेल। माता-पिता तो अपनी बेटियों के लिए अच्छे से अच्छा घर-परिवार और समृद्ध परिवार ढूंढते हैं अपनी बेटियों को संस्कारित बनाए। ऐसा नहीं कि घर-परिवार बड़ा है, पैसे वाला है, तो हमारी बेटी सुखी रहेगी।

ऐसा सोचकर निश्चित मत होइए। अपनी बेटी को संस्कारित और सक्षम बनाए ताकि जीवन में कोई भी परिस्थिति हो तो बेटी मजबूती से अपने पैरों पर खड़ी हो सके। किसी के एक पैसे की मोहताज न हो, किसी के ऊपर निर्भर ना हो, वह स्वयं आत्मनिर्भर हो। आज की बेटियां तो हर क्षेत्र में अव्वल साबित हो रही है। अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी होने के बाद भी शादी करती है। जबकि आज के समय में लड़के थोड़े पीछे हैं, लेकिन लड़कियां तो सपना होता है कि उनकी बेटियां भी अपना नाम रोशन करें और आत्मनिर्भर बने

बेटियां तो हमारे घर की शान है, दो परिवारों की पहचान है और वह स्वयं ही शक्ति का स्वरूप है। स्वयं लक्ष्मी का अवतार है, जिस घर में जन्म लेती है, वहां लक्ष्मी आती है और जिस घर में शादी होकर जाती है मां लक्ष्मी के रूप में बह उनको प्राप्त होती है। ससुराल में तो बेटियों की तो बात ही निराली है। अपनी बेटियों को सक्षम बनाए, काबिल बनाए क्योंकि वह आज की बेटी कल का सुनहरा भविष्य का निर्माण करेगी। बेटियां है तो हम हैं। आज का समय परिवर्तनकारी है। आजकल तो बेटियां जिन माता-पिता के बेटा नहीं होता है और केवल बेटी होती वह बेटियां अपने पिता को अग्नि देती है, दाह संस्कार जैसी रसम भी बेटियां निभाती है। आज की बेटी इतनी हिम्मत वाली है, स्वयं का घर चलती है और अपने माता-पिता के मान सम्मान का ध्यान रख अपने ससुराल के लोगों का भी उतना ही ध्यान रखती है। बेटियां हमारे जीवन में अनमोल उपहार के रूप में ईश्वर ने है तो अपनी बेटियों को सुनहरा भविष्य दीजिए।

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