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समाजशास्त्रीय संघ का दो दिवसीय : राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

Jagbhan Yadav

Sat, Jan 31, 2026

कुम्हारी। छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय संघ तथा स्व. बिंदेश्वरी बघेल शासकीय महाविद्यालय कुम्हारी के संयुक्त तत्वावधान में “वैश्वीकरण एवं उभरता पर्यावरणीय संकट : नागरिक समाज की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का प्रथम दिवस शुक्रवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी अतिथियों को पर्यावरण–अनुकूल पौधे भेंट किए गए तत्पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य एवं सम्मेलन की संरक्षक डॉ. श्रीमती सोनिता सत्संगी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए पर्यावरण संरक्षण में समाजशास्त्र की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा स्व.प्रो. जी. पी. शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफे.प्रीति शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय संघ एवं संयोजिका ने समाजशास्त्र और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। संघ के सचिव डॉ. एल. एस. गजपाल, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने वैश्वीकरण से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक संस्कृति को संरक्षण का सशक्त आधार बताया।

विशेष व्याख्यान में प्रोफे.मनीष के. वर्मा, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ ने वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों पर विचार रखते हुए कोविड–19 काल को प्रकृति के पुनर्संतुलन का उदाहरण बताया।

सेवानिवृत्त प्रोफे. एम. नायक, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के कारण मनुष्य स्वयं समाज एवं पर्यावरण के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

मुख्य वक्ता डॉ. के. सुब्रमण्यम, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी ने छत्तीसगढ़ में वायु गुणवत्ता तथा औद्योगिक गतिविधियों से उत्पन्न पर्यावरणीय असंतुलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की।डॉ. सुचित्रा शर्मा, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ समाजशास्त्रीय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर सम्मेलन स्मारिका का विमोचन कर अतिथियों को सम्मानित किया गया।

द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. संतोष कुमार देवांगन, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छ.ग. की संस्कृति एवं परंपराएँ अत्यंत सुदृढ़ हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने अन्य राज्यों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।इस सत्र में शोधार्थियों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा प्रस्तुत शोध पत्रों के माध्यम से पर्यावरण, समाज और वैश्वीकरण के विविध पक्षों पर सार्थक एवं गहन विमर्श हुआ।

सम्मेलन का समापन पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक दायित्वबोध एवं भावी सामाजिक उत्तरदायित्व के संकल्प के साथ हुआ। इस प्रकार यह आयोजन एक स्मरणीय और प्रभावशाली राष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन के रूप में स्थापित हुआ।

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