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धान खरीदी की शुरुआत में ही सिस्टम ठप: टोकन न मिलने से किसान परेशान : प्रदेशभर में ‘टोकन तुंहर हाथ’ ऐप ठप, 25 लाख से ज्यादा पंजीकृत किसान रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए

Jagbhan Yadav

Sat, Nov 15, 2025

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की नई सीज़न की शुरुआत भारी अव्यवस्था के साथ हुई। सरकार ने 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने का ऐलान किया था, जिससे पूरे प्रदेश के 25 लाख से ज्यादा किसानों को उम्मीद थी कि पहली तारीख से ही उनकी उपज बिक्री के लिए स्वीकार की जाएगी। लेकिन वास्तविक तस्वीर इसके उलट दिखाई दी—किसानों के हाथ में सबसे जरूरी दस्तावेज टोकन ही नहीं पहुंचा।

टोकन तुंहर हाथ ऐप, जो पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाने के लिए तैयार किया गया था, पहले ही दिन बैठ गया। किसान सुबह से लेकर शाम तक ऐप और वेबसाइट पर टोकन निकालने की कोशिश करते रहे, लेकिन सर्वर न चलने के कारण अधिकतर लोग रजिस्ट्रेशन पूरी नहीं कर पाए। कई जगह किसान समितियों के बाहर लाइन में खड़े रहे, तो कहीं इंटरनेट और तकनीकी खराबी के कारण उन्हें बार-बार लौटना पड़ा।

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, रायगढ़ जैसे बड़े जिलों की स्थिति तो और भी गंभीर रही। रायपुर में 1.34 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों में से एक भी किसान को पहले दिन टोकन नहीं मिला। बिलासपुर में 140 उपार्जन केंद्र तैयार हैं, लेकिन कर्मचारी हड़ताल और सप्ताहांत की छुट्टियों के कारण खरीद आगे बढ़ा दी गई। दुर्ग जिले में भी 1.12 लाख किसानों में से मामूली संख्या को ही टोकन जारी हो सके, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई।

बस्तर में 48 हजार से ज्यादा किसानों का पंजीयन पूरा होने के बावजूद निजी एजेंसी द्वारा नियुक्त ऑपरेटर समय पर उपलब्ध नहीं हो पाए, जिसके कारण टोकन वितरण अटक गया। परिणामस्वरूप कई केंद्रों पर खरीदी की शुरुआत बेहद धीमी रही।

इन सबके बीच किसानों के मन में एक ही सवाल है—जब केंद्र तैयार हैं, गाड़ियाँ तैयार हैं और धान कटकर बोरी में भर चुका है, तो बिक्री की प्रक्रिया आखिर कैसे शुरू होगी? बिना टोकन कोई किसान धान लेकर केंद्र तक नहीं पहुंच सकता, और यही वजह है कि पहले ही दिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं।

सरकार की ओर से यह दावा जरूर किया जा रहा है कि वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह बताती है कि डिजिटल सिस्टम की असफलता ने खरीदी प्रक्रिया को शुरुआत में ही बड़ा झटका दिया है। अब किसानों को इंतज़ार है कि टोकन सिस्टम कब सुचारू होगा और वे अपनी उपज बेच सकेंगे।

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