इंजीनियर ने फर्जी दवा कंपनी बनाकर वैध GST नंबर लिया:ऑनलाइन बिजनेस-प्ले : इंजीनियर ने फर्जी दवा कंपनी बनाकर वैध GST नंबर लिया:ऑनलाइन बिजनेस-प्लेटफॉर्म से मंगवाता नशीली दवाएं; खुद खाता, युवाओं को
Jagbhan Yadav
Thu, Sep 18, 2025
इंजीनियर ने फर्जी दवा कंपनी बनाकर वैध GST नंबर लिया:ऑनलाइन बिजनेस-प्लेटफॉर्म से मंगवाता नशीली दवाएं; खुद खाता, युवाओं को बेचता, 17 हजार गोलियां जब्त
दुर्ग में एक इंजीनियर ने पहले दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी कंपनी बनाई। फिर दूसरी कंपनियों से नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं मंगाकर उसे बेचने लगा। लेकिन उसने इसके लिए वैध जीएसटी नंबर लिया था।
अब पुलिस ने बंशी बिहार बोरसी निवासी वैभव खंडेलवाल (30) को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 17 हजार से ज्यादा नशीली गोलियां और 12 सिरप जब्त किया है। आरोपी खुद भी ये गोलियां खाता था। युवक का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी है। घटना मोहन नगर थाना इलाके की है।

फर्जी फर्म बनाकर लिया वैध जीएसटी नंबर
इंजीनियर वैभव ने पहले इंटरनेट पर दस्तावेजों में फेरबदल कर साल 2022 में फर्जी फर्म बनाया। उस फर्म के नाम से जीएसटी नंबर लिया। जीएसटी नंबर वैध है। इसके बाद फर्जी फर्म और लाइसेंस के आधार पर उसने इंडिया मार्ट साइट पर जाकर बी2बी पर खुद को सेलर के रूप में रजिस्टर कराया।
वो सीधे दवा निर्माताओं और इंडिया मार्ट जैसे बिजनेस टू बिजनेस प्लेटफॉर्म से नशे में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं मंगाता था। भुगतान ई-अकाउंट से ऑनलाइन करता था और फिर इन्हें स्थानीय स्तर पर बेचता था।
दूसरे राज्यों से मंगवाता था प्रतिबंधित दवाइयां
पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि, आरोपी वैभव "वैभव फार्मा सिटीकल" नाम से खुद को रजिस्टर किया था। अपने आप को इतना बेहतर बिजनेसमैन जताता था कि दूसरी बड़ी-बड़ी कंपनियां भी इसे दवाइयां देने के लिए तैयार हो गई। इसने गुजरात और राजस्थान समेत अन्य राज्यों से भी दवाएं मंगाए हैं।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि, आरोपी का संपर्क छत्तीसगढ़ के अलावा कई राज्यों के नशे के सौदागरों से भी है। वो ऑनलाइन माध्यम से नेटवर्क चलाता था। पुलिस अब आरोपी के पूरे नेटवर्क और सप्लाई चेन की जांच कर रही है।17 हजार से ज्यादा गोलियां और 12 सिरप जब्त
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से नशे में इस्तेमाल की जाने वाली कई ब्रांड की 17,208 नशीली गोलियां और 12 सिरप जब्त किया है। इनमें जेबिस्कन सिरप, पिएंकोप्लस, अल्प्राजोलम, नाइट्रोटेन, निक्टर और नाइट्रेजपम शामिल हैं।
साथ ही आरोपी के पास से एक मोबाइल भी बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद भी इन दवाओं का सेवन करता था। युवाओं को सप्लाई कर भारी मुनाफा कमाता था।
स्टॉक जमा कर पहचान वालों को बेचता था नशे की दवाई
आरोपी इंजीनियर कंपनियों से माल लेकर स्टॉक करने के बाद वो इन्हें अपने संपर्कों को बेचता था। अपने फ्लैट में दवाइयों का पूरा स्टॉक जमाकर रखा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी का मोबाइल डेटा, बैंक स्टेटमेंट और ई-बैंकिंग रिकॉर्ड बरामद कर जांच में लिया गया है।
कुछ नाम सामने आ रहे हैं, जिनकी सुरक्षा कारणों से फिलहाल उन्हें अभी नहीं बताया जा रहा है। आगे की जांच के बाद एक दो दिन में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
राजस्थान वाले मामले में भी था मुख्य आरोपी
पुलिस ने बताया कि, कुछ समय पहले मोहन नगर थाना क्षेत्र में भी इस तरह का मामला आया था। उस मामले में राजस्थान में दबिश देकर प्रतिबंधित दवाइयों को जब्त किया गया था। उस मामले में भी वैभव खंडेलवाल ही मुख्य आरोपी था।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 326/2025 दर्ज कर धारा 8, 22(ग), 27(क) एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की है। 17 सितंबर को आरोपी को गिरफ्तार कर सीजेएम कोर्ट दुर्ग में पेश किया गया।
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