"डिजिटल अरेस्ट ठगी पर संसद में उठी चिंता: : बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोग सबसे बड़े शिकार, सरकार से कड़े कानून की माँग"
Jagbhan Yadav
Fri, Dec 12, 2025
देशभर में तेजी से बढ़ रही साइबर ठगी ने लोगों की आर्थिक सुरक्षा को गहरी चुनौती दी है। इसी कड़ी में डिजिटल अरेस्ट नाम की नई ठगी का ट्रेंड सामने आया है, जिसमें ठग पुलिस अधिकारी या सरकारी अफसर बनकर वीडियो कॉल करते हैं, वर्दी में दिखाई देते हैं और फर्जी कार्रवाई का भय दिखाकर लोगों से भारी रकम ठग लेते हैं। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाया और बताया कि कैसे कुछ ही मिनटों में लोगों की पूरी जीवनभर की कमाई उड़ा दी जाती है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट गैंग का सबसे बड़ा निशाना बुजुर्ग, अकेले रहने वाले नागरिक और तकनीक से अनभिज्ञ लोग बन रहे हैं। ठग रिटायरमेंट फंड, फिक्स्ड डिपॉज़िट और बचत खाते तक एक झटके में खाली करवा लेते हैं। इसी वजह से इस फ्रॉड का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
सांसद अग्रवाल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ही छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट की आड़ में 40 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें लगभग 32 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर यह ठगी अब 3000 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो साइबर सुरक्षा की कमजोरियों और जागरूकता की कमी को स्पष्ट दर्शाता है।
सांसद ने सरकार से साइबर ठगी के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति की माँग की। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी बैंक खाते से बड़ी राशि ट्रांसफर की जाती है, तो उसकी 50% रकम को कम से कम 24 घंटे के लिए होल्ड कर दिया जाए। इससे पीड़ितों को समय मिल सकता है और ठगी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस गति से डिजिटल फ्रॉड बढ़ रहा है, उसी रफ्तार से तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है। बुजुर्गों और आम लोगों को साइबर जाल से बचाना अब बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि ऑनलाइन ठग लोगों की जीवनभर की कमाई को मिनटों में चट कर रहे हैं।
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