छत्तीसगढ़ : छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मुहिम तेज, पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि पर नेताओं ने किया स्मर
Jagbhan Yadav
Sun, Dec 7, 2025
बिलासपुर में पद्मश्री पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की आठवीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। पं. चतुर्वेदी के योगदान को स्मरण करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठी।
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कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पं. श्यामलाल चतुर्वेदी छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, भाषा और साहित्य के प्रतीक थे। उन्होंने अपने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सुप्रसिद्ध कृतियाँ ‘बेटी के विदा’ और ‘पर्रा भर लाई’ ने उन्हें घर–घर में लोकप्रिय बनाया।
वरिष्ठ पत्रकार रुद्ध अवस्थी ने बताया कि पं. चतुर्वेदी का सपना था कि छत्तीसगढ़ी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिले और उसे केंद्र की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सपना अभी अधूरा है और इसे पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में विधायक सुशांत शुक्ला ने पं. चतुर्वेदी और जूदेव के बीच के एक भावपूर्ण प्रसंग को साझा किया, जिससे दोनों की आपसी सम्मान और निकटता का पता चलता है। वहीं भाजपा नगर प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक किशोर राय ने बताया कि पं. चतुर्वेदी ने छत्तीसगढ़ के हित के लिए छह दशकों से अधिक समय तक पत्रकारिता और भाषा-साहित्य की सेवा की।
बेलतरा विधायक सुषांत शुक्ला ने कहा कि पं. चतुर्वेदी ने जाति, वर्ग और संप्रदाय से ऊपर उठकर ‘छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान’ को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने घोषणा की कि ‘पुरखा के सुरता’ कार्यक्रम के अंतर्गत उनके नाम पर साहित्य केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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Chhattisgarh, Shyamlal Chaturvedi, Language Movement, 8th Schedule, Bilaspur Event, Chhattisgarhi Literature, Tribute
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