बिलासपुर रेल हादसे पर बड़ी कार्रवाई: : रिपोर्ट ने खोली लापरवाही की परतें, DRM समेत कई अफसरों का तबादला
Jagbhan Yadav
Fri, Dec 12, 2025
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 4 नवंबर को हुए दर्दनाक रेल हादसे ने रेलवे सिस्टम की कई खामियों को उजागर कर दिया। इस हादसे में 12 यात्रियों की मौत और दर्जनों लोग घायल हुए थे। घटना के बाद रेलवे प्रशासन पर सवाल उठने लगे और जांच की ज़िम्मेदारी रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) बीके मिश्रा को सौंपी गई। उनकी 30 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आते ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए—सिग्नल नियमों की अनदेखी, ट्रेन संचालन में गंभीर चूक, लोको पायलट के गलत निर्णय और रेल तकनीक में कई कमियां इस हादसे की मुख्य वजह मानी गईं।
रिपोर्ट आने के तुरंत बाद रेलवे बोर्ड ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बिलासपुर के DRM राजमल खोईवाल और प्रिंसिपल चीफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर राजीव कुमार बरनवाल को पद से हटा दिया। उनकी जगह वेस्टर्न रेलवे के उमेश कुमार को नया डीआरएम नियुक्त किया गया। इससे पहले भी इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों—प्रिंसिपल चीफ सेफ्टी ऑफिसर सुबोध चौधरी और सीनियर डीओपी मसूद आलम—को हटाया जा चुका था। कुल मिलाकर अब तक चार बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
हादसे की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि CRS ने तीन चरणों में जांच की और हर चरण में लापरवाही की नई परतें सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि जिस लोको पायलट को ट्रेन संचालन की ज़िम्मेदारी दी गई, वह साइकॉ टेस्ट में फेल हुआ था, फिर भी उसे ड्यूटी पर लगा दिया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही हादसे की बड़ी वजह बनी। घटना के बाद रेलवे ने लगातार पूछताछ और बयान दर्ज कर कई अधिकारियों से जवाब तलब किया, जिसके बाद स्थानांतरण और निलंबन जैसी कार्रवाईयां शुरू हुईं।
यह मामला केवल एक रेल हादसा नहीं, बल्कि पूरे रेलवे सिस्टम में मौजूद खामियों का आईना बनकर सामने आया है। रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि सिग्नलिंग, सुरक्षा और ट्रेन संचालन में स्थापित मानकों का पालन ईमानदारी से किया जाता, तो यह त्रासदी टल सकती थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे किस स्तर पर सुधार लाता है।
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