बिलासपुर : झारखंड से छुड़ाए गए बिलासपुर के 16 मजदूर: अमानवीय स्थितियों में कराया जा रहा था काम, शिकायत के बाद प्रशासन की तत्काल का
Jagbhan Yadav
Thu, Dec 11, 2025
बिलासपुर जिले के सरगांव ग्राम के 16 श्रमिकों—जिनमें महिलाएं, पुरुष और दो बच्चे शामिल थे—को झारखंड के सिमडेगा जिले के एक ईंट भट्टी से मुक्त करा लिया गया। बताया गया कि श्रमिकों को वहां बांधकर रखा गया था और उनसे अमानवीय परिस्थितियों में जबरन काम करवाया जा रहा था। महिलाओं से छेड़छाड़ और पुरुषों से मारपीट की शिकायत भी सामने आई थी। यह मामला कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचने के बाद उजागर हुआ।
जनदर्शन में पहुंची पीड़ा—मामले ने लिया गंभीर मोड़
9 दिसंबर को साप्ताहिक जनदर्शन के दौरान सरगवां के निवासी अमित कुमार मधुकर ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को आवेदन देकर बताया कि गांव के 16 श्रमिकों को झारखंड ले जाकर ईंट भट्टी में बंधक बना लिया गया है। श्रमिकों ने फोन के जरिए बताया था कि वे अत्याचार सह रहे हैं और भाग भी नहीं सकते।
कलेक्टर ने श्रम विभाग को तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया
शिकायत की गंभीरता देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत श्रम विभाग को निर्देश जारी किए। श्रम विभाग ने जांच के बाद ईंट भट्टी के ठेकेदार नीलकंठ अंबेडकर को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
विभाग आने वाले दिनों में श्रम न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई शुरू करेगा।
दो जिलों के प्रशासन ने मिलकर किया रेस्क्यू ऑपरेशन
बिलासपुर प्रशासन ने सिमडेगा जिले के प्रशासन से समन्वय स्थापित किया। श्रमिकों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और निरंतर संपर्क बनाए रखा गया।
इस समन्वयपूर्ण कार्रवाई का परिणाम रहा कि 10 दिसंबर की सुबह सभी श्रमिकों को सुरक्षित मुक्त करा दिया गया।
श्रमिक सकुशल घर लौटे—परिवारों ने जताया आभार
मुक्त किए गए श्रमिकों—महिलाओं, पुरुषों और बच्चों—को प्रशासन द्वारा सकुशल उनके गांव सरगांव, तहसील मस्तूरी वापस भेज दिया गया।
श्रमिकों और उनके परिवारों ने सुरक्षित वापसी के लिए कलेक्टर, श्रम विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
श्रम विभाग आगे भी करेगा कठोर कार्रवाई
श्रम विभाग ने स्पष्ट किया कि बंधुआ मजदूरी, जबरन श्रम और श्रमिकों के शोषण के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ठेकेदार के खिलाफ सभी पहलुओं पर जांच जारी है और श्रम न्यायालय में आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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