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Vivah Muhurat 2025: इस बार देवउठनी एकादशी पर नहीं बजेगी शहनाई, सूर्य क : Vivah Muhurat 2025: इस बार देवउठनी एकादशी पर नहीं बजेगी शहनाई, सूर्य की चाल डालेगी अड़ंगा, इस दिन से शुरू होंगे विवाह

Jagbhan Yadav

Mon, Oct 27, 2025

Dev Uthani Ekadashi Vivah Muhurat 2025: आमतौर पर देवउठनी एकादशी से विवाह मुहूर्त की शुरुआत मानी जाती है। लेकिन बीते साल की तरह इस बार भी ऐसा नहीं हो पाएगा। इस बार बड़ी ग्यारस पर शादियां नहीं होगीं। ऐसा सूर्य की चाल के कारण हो रहा है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्यारस के बाद शादियां कब शुरू होंगी, इस सूर्य कब वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। जानते हैं ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री से।

देवउठनी ग्यारस 2025 कब है

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस बार देवउठनी ग्यारस 1 नवंबर 2025 शनिवार को आ रही है। इस दिन माता तुलसी और भगवान विष्णु का विवाह संपन्न होगा। धर्म शास्त्र के अनुसार इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह संपन्न हो जाता है।

इस दिन से मौसमी फलों में आवंला, हरी सब्जियां, भाजी, बेर आदि का सेवन किया जाने लगता है।

देव उठनी एकादशी पर शादियां क्यों नहीं हैं

आम तौर पर विवाह के लिए कुंडली में सूर्य की चाल देखी जाती है। जब तक ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार इस बार देवशयनी एकादशी पर विवाह नहीं (Shadi ke Muhurat 2025 in Hindi) होंगे। इसका कारण सूर्य की चाल होगी।

दरअसल जब सूर्य वृश्चिक राशि (Vrishchik me Surya ka Gohcar 2025) में नहीं होते, जब शादियां शुरू नहीं होती। इस बार देवउठनी एकादशी 1 नवंबर को है, इस दौरान सूर्य तुला राशि में रहेंगे, जबकि 16 नवंबर को सूर्य वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

यही कारण है कि इस बार देवउठनी एकादशी पर शादियां नहीं होंगी। जैसे ही सूर्य वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे, शादियां शुरू हो जाएंगीं।

खरमास में नहीं होती शादियां

ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार जब धनु संक्रांति (Dhanu Sankranti 2025 me Kab hai) होती है। यानी जब सूर्य धनु संक्रांति में होते हैं तो इस दौरान किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते। इस महीने को खरमास, पूष का महीना भी कहते हैं। इस एक महीने में शादियां नहीं होती हैं।

क्या होता है देव शयन (Kya Hota Hai Dev Shayan)

देव शयन का अर्थ है भगवान विष्णु के सोने का समय। इस समय को चौमासा भी कहते हैं। कहा जाता है कि भगवान इन 4 महीनों में पाताल लोक में बलि के द्वार पर विश्राम करते हैं।

नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। द न्यूजइंडिया लाइव इसकी पुष्टि नहीं करता। अमल में लाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ले लें।

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