Friday 17th of April 2026

ब्रेकिंग

कुछ राशियों को लाभ, तो कुछ को रहना होगा सतर्क, पढ़ें राशिफल

जानिए भाषण की बड़ी बातें

उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी से हुआ हादसा, सिस्टम ने दी थी चेतावनी

छत्तीसगढ़ में 2292 सहायक शिक्षकों की भर्ती शुरू, नोट कर लें परीक्षा की डेट… जानिए सबकुछ

कैबिनेट मंत्री देवांगन ने घायलों का जाना हालचाल, बेहतर उपचार के दिए निर्देश

सुचना

Welcome to the The News India Live, for Advertisement call +91-9406217841, 9407998418

: आज जया एकादशीपर जानें शुभ मुहूर्त, पूजाविधि,भोग और पारण टाइमिंग…

Jagbhan Yadav

Sat, Feb 8, 2025

नई दिल्ली:– हर माह में आने वाली एकादशी तिथि जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णुजी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जया एकादशी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत रखने से जातक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन स्नान-दान के कार्यों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल 08 फरवरी को जया एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि जया एकादशी के दिन लक्ष्मी-नारायण की विधिवत पूजा करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और साधक को जीवन के सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं जया एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और पारण टाइमिंग…

कब है जया एकादशी ?
द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 फरवरी को रात 09 बजकर 26 मिनट से होगी और अगले दिन 08 फरवरी 2025 को रात 08 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 08 फरवरी को जया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। जया एकादशी के दिन सुबह 07 बजकर 05 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 07 मिनट तक रवि योग का निर्माण हो रहा है।

शुभ मुहूर्त :
ब्रह्म मुहूर्त -05:21 ए एम से 06:13 ए एम

अभिजित मुहूर्त- 12:13 पी एम से 12:57 पी एम

प्रातः सन्ध्या-05:47 ए एम से 07:05 ए एम

पारण टाइमिंग : 08 फरवरी 2025 को एकादशी व्रत रखने वाले जातक 09 फरवरी को द्वादशी तिथि में सुबह 07 बजकर 04 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 17 मिनट के बीच पारण कर सकते हैं।

जया एकादशी 2025 :पूजाविधि
जया एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें।

स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।

विष्णुजी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।

इसके बाद विष्णुजी की पूजा-अर्चना करें।

विष्णुजी की फल, फूल,धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

इसके बाद विष्णुजी को पंचामृत,पीले रंग की मिठाई और मखाने की खीर का भोग लगाएं।

विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। विष्णुजी के मंत्रों का जाप करें।

अंत में विष्णुजी के साथ मां लक्ष्मी की आरती उतारें।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें