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: मुंह मारना गलत शब्द नहीं...अनिरुद्धाचार्य का तीखा बयान, कहा- संत प्रेमानंद जी का भी विरोध हुआ इसलिए...

Jagbhan Yadav

Sun, Aug 10, 2025

नेशनल डेस्क: अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अब अपनी टिप्पणी पर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है और "मुंह मारना" कोई गलत शब्द नहीं है। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके शब्द केवल "चरित्रहीन पुरुष और महिला" के लिए थे।

क्यों हुआ विवाद?
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उनका बयान किसी को नाराज़ करने के लिए नहीं था, बल्कि उन लोगों के लिए था जो गलत काम करते हैं। उन्होंने कहा, "चोर को चोर न कहा जाए तो क्या कहा जाए?" उन्होंने यह भी दावा किया कि यह विवाद उनके बयानों को लेकर नहीं, बल्कि हिंदू संतों के ख़िलाफ़ एक साजिश है।

अनिरुद्धाचार्य ने आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद जी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि जब उनका भी विरोध हुआ था, तो यह साफ हो गया था कि यह विरोध भाषा का नहीं, बल्कि संतों के प्रति है।

'बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया'
कथावाचक ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी टिप्पणी को उसके सही संदर्भ में समझा जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया "मुंह मारना" शब्द शायद ग्रामीण हो, लेकिन उनका मूल संदेश सही था। उन्होंने कहा कि उनके पूरे 6 मिनट के वीडियो में से सिर्फ़ 30 सेकंड की क्लिप को ही दिखाया गया है, जिससे हंगामा खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही बातें कहीं हैं जो भारतीय शास्त्र सिखाते हैं: "अपनी पत्नी या पति के प्रति वफादार रहें, पराई स्त्री या पुरुष की ओर न देखें।" उन्होंने समाज में बढ़ती अश्लीलता पर भी चिंता जताई और कहा कि ऐसी चीज़ों को रोका जाना चाहिए।

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