शारदीय नवरात्रि का महानवमी और कन्या भोज आज, इन शुभ मुहूर्त में करें कन : शारदीय नवरात्रि का महानवमी और कन्या भोज आज, इन शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन
Jagbhan Yadav
Wed, Oct 1, 2025
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन भक्त मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की आराधना करते हैं और कन्या पूजन के साथ नवरात्र का पारण करते हैं…
नईदिल्ली (ए)। 01 अक्टूबर यानी आज शारदीय नवरात्र की महानवमी है और यह नवरात्र का आखिरी दिन है. इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. यह दिन अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है. भक्त इस दिन कन्या पूजन करके शारदीय नवरात्र का पारण करते हैं. तो चलिए जानते हैं कि आज शारदीय नवरात्र पर कितने से कितने बजे तक कन्या पूजन का मुहूर्त रहेगा और साथ ही हवन का मुहूर्त कितने बजे रहेगा।
आश्विन मास की नवमी तिथि की शुरुआत 30 अक्टूबर यानी कल शाम 6 बजकर 06 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 1 अक्टूबर यानी आज शाम 7 बजकर 01 मिनट पर होगा. महानवमी पर देवी दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी रूप की पूजा-अर्चना की जाती है।
महानवमी की पूजा के बाद हवन करना भी शुभ माना जाता है, जो आज सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक करने का सबसे अच्छा मौका मिलेगा. इस समय हवन और कन्या पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है।
आश्विन मास की महानवमी का पहला कन्या पूजन मुहूर्त आज सुबह 5 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. इसके बाद, दूसरा मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 09 मिनट से लेकर 2 बजकर 57 मिनट पर रहेगा।
महानवमी पर कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें और उनका स्वागत करें. कन्याओं को आरामदायक स्थान पर बिठाकर उनके पैरों को दूध से धोएं और उनके माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं. कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा और उपहार दें. कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और मां भगवती की कृपा प्राप्त करें।
मां सिद्धिदात्री की पूजा में घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. मां सिद्धिदात्री को विभिन्न भोग जैसे मिश्री, गुड़, हरी सौंफ, केला, दही, देसी घी और पान का पत्ता अर्पित करें. इसके बाद देवी मां से प्रार्थना करें कि वे सभी ग्रहों को शांत करें और सुख-शांति प्रदान करें।
महानवमी 2025 हवन का समय
महानवमी पर हवन सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 40 मिनट तक करने का सबसे अच्छा माना जाता है।
नवरात्रि में महा नवमी का दिन विशेष महत्व रखता है। यह नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन होता है, जिसे देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री को समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी सभी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। महा नवमी पर हवन, शस्त्र पूजन और कन्या पूजन करने की परंपरा है, जो न केवल आध्यात्मिक पुण्य प्रदान करती है बल्कि घर में सुख, समृद्धि और शांति भी लाती है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे महा नवमी से जुड़े हर सवाल का जवाब देंगें, जैसे महा नवमी कब मनाई जाती है, इसका महत्व, पूजा विधि, मंत्र, भोग और शुभ मुहूर्त। आइए इस बारे में जानें-
महा नवमी कब मनाई जाती है?
महा नवमी नवरात्रि का नौवां दिन है और आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है। यह दिन हिंदू पंचांग के नौवें स्वरूप देवी दुर्गा, मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। महा नवमी को नवरात्रि के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
महा नवमी का क्या महत्व है?
महा नवमी का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन देवी दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा और हवन के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी सभी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
महा नवमी 2025 की तिथि और दिन क्या है?
2025 में, महा नवमी 30 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेगी। इस दिन, शुभ मुहूर्त में शाम 6:06 बजे पूजा और हवन शुरू हो जाते हैं।
महा नवमी किस देवी को समर्पित है?
महा नवमी देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है। वे देवी दुर्गा के नौ शक्तिशाली रूपों में से एक हैं और सभी विपत्तियों और बुरी शक्तियों का नाश करने वाली मानी जाती हैं।
महा नवमी पर कौन सी पूजा की जाती है?
इस दिन, सुबह स्नान-ध्यान के बाद, देवी सिद्धिदात्री का हवन और पूजन किया जाता है। नौ कन्याओं का पूजन और उन्हें भोजन व दक्षिणा देना भी अनिवार्य है। पूजा के दौरान फल, नारियल, लाल फूल और दुपट्टा चढ़ाया जाता है।
महा नवमी और दुर्गा पूजा के बीच क्या संबंध है?
महा नवमी दुर्गा पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। नवरात्रि के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और महा नवमी पर हवन, पूजा और कन्या पूजन करने से नवरात्रि का पूरा पुण्य प्राप्त होता है।
महा नवमी पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसलिए, महा नवमी पर नौ कन्याओं का पूजन करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजा घर में सुख-शांति, समृद्धि और पति की दीर्घायु सुनिश्चित करने के लिए की जाती है।
महा नवमी पर कौन से मंत्रों का जाप किया जाता है?
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